कहानी की शुरुआत होती है मशहूर बिल्डर और मजूमदार परिवार के बड़े बेटे परेश मजूमदार के क़त्ल से, जो परिवार के फार्म हाउस में मृत पाया जाता है। उसके सीने में खंजर घोंप कर उसकी हत्या कर दी जाती है।
बड़े ही अप्रत्याशित तरीके से केस आता है एक सफल प्राइवेट इन्वेस्टिगेटर विनय अग्निहोत्री के पास। विनय अग्निहोत्री के लिए ये केस किसी दूसरे केस की तरह कोई सामान्य केस नहीं, बल्कि उसकी खुद की जिंदगी से जुड़ा हुआ मामला साबित होता है।
रहस्यमय परिस्थिति में हुए उस क़त्ल की जांच विनय अग्निहोत्री के लिए एक टेढ़ी खीर साबित होती है, क्यों कि कातिल ने बिना कोई सबूत पीछे छोड़े क़त्ल बड़ी सफाई से किया होता है। जैसे जैसे क़त्ल की जांच आगे बढ़ती है, मामला साफ़ होने बजाय