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प्रेमचंद की यादगार कहनियां

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प्रेमचंद की कहानियों में जन साधारण की भावनाओं, परिस्तिथियों और उनकी समस्यायों का मार्मिक चित्रण किया गया है।

208 pages, Paperback

First published January 1, 2010

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About the author

मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand) हिन्दी और उर्दू के महानतम भारतीय लेखकों में से एक हैं। मूल नाम धनपत राय श्रीवास्तव वाले प्रेमचंद को नवाब राय और मुंशी प्रेमचंद के नाम से भी जाना जाता है। उपन्यास के क्षेत्र में उनके योगदान को देखकर बंगाल के विख्यात उपन्यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ने उन्हें उपन्यास सम्राट कहकर संबोधित किया था। प्रेमचंद ने हिन्दी कहानी और उपन्यास की एक ऐसी परंपरा का विकास किया जिसने पूरी सदी के साहित्य का मार्गदर्शन किया। आगामी एक पूरी पीढ़ी को गहराई तक प्रभावित कर प्रेमचंद ने साहित्य की यथार्थवादी परंपरा की नींव रखी। उनका लेखन हिन्दी साहित्य की एक ऐसी विरासत है जिसके बिना हिन्दी के विकास का अध्ययन अधूरा होगा। वे एक संवेदनशील लेखक, सचेत नागरिक, कुशल वक्ता तथा सुधी (विद्वान) संपादक थे। बीसवीं शती के पूर्वार्द्ध में, जब हिन्दी में तकनीकी सुविधाओं का अभाव था, उनका योगदान अतुलनीय है। प्रेमचंद के बाद जिन लोगों ने साहित्‍य को सामाजिक सरोकारों और प्रगतिशील मूल्‍यों के साथ आगे बढ़ाने का काम किया, उनमें यशपाल से लेकर मुक्तिबोध तक शामिल हैं।

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Displaying 1 - 2 of 2 reviews
Profile Image for Riya Barthwal.
56 reviews1 follower
July 11, 2026
इस किताब की कुछ कहानियाँ मुझे सच में अच्छी लगीं, लेकिन पूरी किताब पढ़ने के बाद मेरे मन में इसे लेकर मिले जुले विचार ही रहे। कई कहानियाँ सोचने पर मजबूर करती हैं, लेकिन कुछ ऐसी भी थीं जिनसे मैं बिल्कुल जुड़ नहीं पाई।

कुछ जगहों पर मुझे लगा कि लेखक क्रुर शासकों (जैसे नादिर शाह, जिनके शासन और आक्रमण से भारी जनहानि हुई) और अंग्रेज़ों के प्रति ज़रूरत से ज़्यादा सहानुभूति रखते हैं। उन्होंने उन्हे सकारात्मक रूप मे प्रस्तुत किया। एक पाठक के रूप में यह दृष्टिकोण मुझे सहज नहीं लगा और कई जगह ऐसा महसूस हुआ कि उनके क्रूर पक्ष की अपेक्षा उनका सकारात्मक चित्रण अधिक किया गया है।

वहीं, सती और पति-धर्म से जुड़े कुछ प्रसंग भी मुझे सहज नहीं लगे। खासकर एक कहानी में, जहाँ एक स्त्री पहले अपने पति से अन्याय का बदला लेने की बात करती है, लेकिन बाद में उसी पति की मृत्यु पर अपने भाई को शाप दे देती है। उस कहानी का यह हिस्सा मुझे बिल्कुल समझ नहीं आया।

फिर भी, प्रेमचंद की कहानियाँ अपने समय के समाज को सामने लाने का काम करती हैं और यही बात इस संग्रह को पढ़ने लायक बनाती है।
This entire review has been hidden because of spoilers.
Profile Image for Yash Sharma.
408 reviews16 followers
March 30, 2026
'प्रेमचंद की श्रेष्ठ बाल कहानियाँ', हिंदी साहित्य के महान लेखक, मुंशी प्रेमचंद की सात कहानियों का एक संग्रह है। इस पुस्तक में निम्नलिखित कहानियाँ शामिल हैं:
1. ईदगाह
2. दो बैलों की जोड़ी
3. रामलीला
4. गुल्ली-डंडा
5. नमक का दारोगा
6. बूढ़ी काकी
7. पंच परमेश्वर

हर कहानी हमारे समाज, परिवार, मित्रता, लालच और सबसे महत्वपूर्ण रूप से सत्य तथा धर्म के मूल्यों के बारे में कुछ न कुछ बताती है। विशेष रूप से धर्म और सत्यनिष्ठा का महत्व—जिनका पालन व्यक्ति को जीवन की हर परिस्थिति में सदैव करना चाहिए।
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