‘दीया की शर्मिंदगी’ एक सुप्रसिद्ध कामोत्तेजक अभिनेत्री दीया और उसके पुराने प्रेमी एवं मौजूदा स्टॉकर तनुज की कहानी है, जिसे अब वह अपना ‘घटिया आशिक’ बताती है। एक जाना-माना लेखक और ब्लॉगर तनुज दीया की अपने प्रति बेरुखी से आहत होकर इंटरनेट पर सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके दीया को शर्मसार करने के लिए उसकी नग्न तस्वीरें और अपना एक आपत्तिजनक वीडियो पोस्ट करता है, जिसके लिए वह कैप्शन देता है - "अपनी चूत का दाम बता।" वीडियो वायरल हो जाता है और दीया शर्मसार हो जाती है, जिसकी वजह से वह अपने ब्वॉयफ्रेंड राज की मदद से तनुज को कानूनी तरीके से सबक सिखाने का मन बनाती है। अब मुंबई पुलिस और साइबर क्राइम सेल तनुज के पीछे पड़ जाती है। तनुज को गिरफ्तार कर लिया जाता है। डिटेंशन सेंटर में वह अपने सबसे भरोसेमंद दोस्त फिक्सर को बुलाता है और फिर उसकी मदद से अपनी जमानत का प्रबंध करवाता है। इसी दौरान हम हैकर्स की रहस्यमय दुनिया से भी परिचित होते हैं, जो साइबर सबूत मिटाने में माहिर होते हैं और पुलिस एवं साइबर क्राइम सेल के लिए एक एंटीडोट के रूप में काम करते हैं। क्या दीया अपने सार्वजनिक अपमान का बदला लेने में कामयाब रही? समाज रिवेंज पोर्न के बारे में क्या राय रखता है, वह भी इस स्थिति के मद्देनजर कि इस नए तरीके के अपराध को रोकने के लिए कोई सख्त कानून नहीं है? पुस्तक में इन्हीं विषयों को शामिल किया गया है।
कुछ किताबें चमत्कार करती हैं। कुछ पंक्तियाँ बोलती हैं। केवल इस पंक्ति के कारण में अपनी ओर से समीक्षा/रिव्यू करने के लिए यहां आया हूं। हर किस्म के लोग है दुनिया में और हर किस्म के व्यक्ति की एक अलग पहचान है। दिया की शर्मिंदगी किताब एक रहस्यमय किताब सी है जहा अनेक राज दफन है। जहा औरों को लगता है की उन्हें हम गीदड़ भभकी दे रहे हैं, वोही दूसरी ओर लेखक ने कहानी में हर किरदार की अहमियत बताते हुए एक अलग सा मोड़ कहानी में चित्रित किया है पाठक को समझाने के लिए।
मुझे नहीं पता कि हम लोगो में से कितने लोग ऐसा महसूस करते हैं, और कितने लोग ऐसा महसूस करते हुए अपनी सांस को कण कण की तरह खो देते हैं जब कोई व्यक्ति एक औरत से कहे की अपना दाम बता । जब हम सत्ताधारी शासन के बारे में सोचते हैं तो अस्तित्व पंगु हो जाता है, लेकिन तब, इस तरह की किताबें और लेख ही हमारे भीतर से इन भावनाओं को बाहर निकालते हैं। मुझे नफरत, जुनून, प्यार, सदाबहार ऐसे मूल आधार की कहानी बहुत पसंद थी। इन चीजों से जुड़ कथा पढ़ना एक सफर की तरह है। यह बुक अनुज सर की उन सभी के लिए अनुशंसित है जो कुछ अनसुना सुनना चाहते है। किताब में हिंदी और अंग्रेजी दोनों का मिश्रण किया गया है।
आधुनिकता की चकाचौंद में कितना कुछ बीत जाता है आंखों के सामने होने पर भी। मैंने दो दिन में दो बार पढ़ी ये किताब अनुज जी की, जो एक हैरान कर देने वाली कहानी को उभरते हुए तरीके से प्रस्तुत करती है। कहानी में सिर्फ कहानी नहीं, बल्कि एक सच्च, बातों की लड़ाई, डायलॉग्स जैसे की पढ़ने वाला एक मनोरंजन से भरा तमाशा देख रहा हो। कहानी का हर हिस्सा, एक अद्भुत और गहरा किस्म का है। मुझे पसंद आई यह अलग से प्रस्तुत किताब जिसे एक अलग तरह से कहानी के माध्यम से पेश किया है। ऐसी कहानियां मुझे हमेशा खुश कर जाती है जहा बाकी कहानियों की तरह सपने नही दर्शाते। ऐसी कहानियां जो हिंदी में लिखी गई हो, उससे जरूर पढ़ना चाइए एक बार क्युकी इसमें न सिर्फ लेखक की मेहनत होती है, बल्कि इसमें भाषा के प्रति प्रेम भी झलकता है और जिस तरह से हर पन्ने पे कहानी का एक एक राज़ खुलता है, वो पढ़ना मुझे काफी रास आया।
कोई कभी कश्मकश सी लगती है जिंदगी तो कभी कोई नाराजगी में खामोश बैठे लम्हे सी लगती है जिंदगी। मुझे कहानी का सारांश जो समझ आया, उससे में काफी हद तक अब प्रेरित भी होने लगा हु और मिली है मुझे एक सीख। लेखक ने खुबसूरती से ही नही, बल्कि एक किस्म की मेहनत और जिंदगी में पल रही अनेक चीजों की अहमियत को दर्शाया है जब एक साथ परेशानियों का पूल टूट जाता है एक व्यक्ति पर। कहानी का मूल आधार जो शीर्षक के इर्द गिर्द घूमती है, एक बहुत अतरंगी सी कहानी बता है। किताब न ज्यादा बड़ी है पन्नो के आधार पर, ना किसी ऐसी चीज को कह जाती है जो किसी मायने नही लगती। मुझे किताब एक संक्षिप्त रूप से पसंद आई और मेरे अनुसार ऐसी किताबें ही आखिर में एक कड़वे सच को दुनिया के सामने रख जाती है। दिया की शर्मिंदगी किताब में, अनेक दृश्य एक अनोखे तरीके से बताए गए है जो पाठकों को जरूर पसंद आएगी।
जैसे रुख हवा का बदलता है तो मन की दिशा भी एक कार्य से दूसरे की ओर बढ़ती है, वैसे ही जिंदगी में तकलीफें है जो एक के टल जाने पे, दूसरे अनेक परेशानियों को न्योता देती है। मुझे काफी समय बाद कुछ असलियत पे आधारित पढ़ने का मन किया और यह किताब जो की अनुज जी के द्वारा लिखित है, एक ऐसी कहानी को सामने लाती है, जो न केवल एक सच्ची घटना पे आधारित, बल्कि यह कही और सवालों के अनसुने जवाब को कह जाती है। किताब भले ही छोटी है पढ़ने में, पर जिस गति से कहानी अंत तक पहुंचती है, मुझे लगता है यह किताब पाठक दोबारा पढ़ जाएगा। कुछ हिस्से किताब के, और बेहतर हो सकते थे अन्यतः सब अपनी जगह पे पूरी तरह से सही है। किताब एक ऐसे मोड़ पे खतम होती है जो की मेरी नजर में, एक काबिलियत तारीफ काम के दर्जे पे है।
रहती जिंदगी बहती हाथ से रेत की तरह है। कभी होश में लगती है खुशियां जब साथ हो तो कभी खोई हुआ जिंदगी सी, जब कोई किस्सा अनजान से, रातों की नींद उड़ा ले जाए दूर कही। मुझे कहानी के सारांश ने किताब को पढ़ने पे प्रेरित किया और कहानी रोमांचक मोड़ पे खतम होती नजर आई। लेखक ने न केवल असली बातों को तराशते हुए लिखा है, बल्कि लेखक अनुज ने, एक दूसरे सिरे से दिखने वाली कहानी का चेहरा बताया है जो मुझे बहुत पसंद आई। लेखक ने अनेक किताबों में अपना योगदान दिया है और हर पन्ना एक तजुर्बे से की गई बात सी लगती है किताब छोटी है और इससे चंद घंटों में पूरा पढ़ा जा सकता है। कहानी का शीर्षक ऐसा की आधी कहानी यह खुद कह जाए और पाठक को पढ़ने की ओर पुकारे