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हा सर, मैंने अपने बाप को मारा !

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‘हा सर मैंने अपने बाप को मारा!’ एक पिता और पुत्र की ऐसी कहानी है, जिसमें बताया गया है कि कैसे एक बेटा दो महीने की अवधि तक मुंबई को हिलाकर रख देने वाले जघन्य हत्याकांडों का हिस्सा बनते हुए एक तरह से अपने ही पिता की हत्या के लिए जिम्मेदार बन जाता है? इस पुस्तक में विजय पालांडे नामक एक हत्यारे द्वारा एक के बाद एक हत्या किए जाने का वर्णन किया गया है। यह उस हत्याकांड में एकमात्र जीवित बचे शख्स की कहानी है, जो अपने ही पिता की नृशंस हत्या के पीछे की कहानी बताने के लिए जीवित बचता है।

87 pages, ebook

Published January 10, 2022

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Anuj Tikku

101 books7 followers

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Displaying 1 - 5 of 5 reviews
3 reviews
March 5, 2022
एक बात जो इस पुस्तक को अन्य सेलिब्रिटी जीवनियों और संस्मरणों से अलग करती है, वह है वह स्पष्टता जिसके साथ अनुज ने अपने पिछले जीवन का खुलासा किया। कई अन्य लोगों की तरह, वह अपनी गलतियों से बचाव नहीं करता है और न ही जब वह जीवन के प्रमुख निर्णयों की बात करता है तो वह रक्षात्मक नहीं होता है। इसके बजाय, वह सब कुछ वैसे ही बताता है जैसे वह है - अक्सर अपने स्वयं के अपराध के बारे में बात करना और जीवन के विकल्पों पर विलाप करना, जिस पर वह अपने पिता की मृत्यु को दोष देता है।

मुझे उस हिस्से को पढ़ना अच्छा लगा जहां अनुज बॉलीवुड में अपने संघर्षों का वर्णन करता है। एक बाहरी व्यक्ति जो अपने दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत के बल पर एक अंदरूनी सूत्र बन जाता है, वह कुछ ऐसा है जो मेरे अंदर के पाठक को बहुत दिलचस्प लगा।

यह एक शालीनता से चलने वाला उपन्यास।
मेरे लिए इस पुस्तक को पढ़ना ज्यादा इंटरेस्टिंग इसलिए रहा
1. सरल भाषा
2. अच्छी गति
3. बहुत स्पष्टवादी जिसने मुझे किताब के एक हिस्से की तरह महसूस कराया।
3 reviews
February 6, 2022
मुझे अक्सर कुछ किताबों में एक अलग सी खोज रहती है। कभी नएपन की तो कभी एक एहसास के सीख की।
पुस्तक का शीर्षक इसकी शैली के बारे में बहुत कुछ बताता है। हाँ, यह क्राइम थ्रिलर है, लेकिन बहुत सी पुस्तकों से हटकर है। यह एक काव्यात्मक अध्याय से शुरू होता है और फिर अंत तक खुद को गद्य के रूप में प्रस्तुत करता है। कहानी में रहस्य है, सवाल है, बहस बाज़ी है और कुल मिलाकर एक समझ है।
एकमात्र निराशा पुस्तक की प्रस्तुति है। कुछ ऐसा था जिसने मुझे कहानी में लीन होने से दूर रखा बाकी सब खास सा। मैं कहानी को उतना जी न सकी मगर लेखक का संदेश मुझ तक बेशक पहुंचा।

एकमात्र चीज़ जो मुझे काफि पसंद आयी वह यह थी कि किताब सच्चे इमोशन से लिखी गयी थी।।
मेरे लिए अनुज टिक्कू का यह संघर्ष से भरा जीवन काफि दुखदाई था पर शब्दों का जादू वन टाइम रीड ही रहा!
9 reviews
February 6, 2022
जो चीज हमारे सोच कर भी परे हैं उस चीज को लेखक अनुज टिक्कू ने दिया है कैसा रहेगा जब आप एक हैरतअंगेज और खतरनाक मर्डर सीरीज के इकलौते गवाह बचेंगे यह कोई फिक्शनल स्टोरी नहीं बल्कि अनुज के साथ घटी घटना है जिसमें उन्होंने अपने पिता तक को खो दिया अपने ही आंखों के सामने यह सब होते देखना कोई आम बात नहीं थी यह किताब काफी इमोशनल किताब रही।

कहानी काफि संजीदा रही। मैं आखिर तक अपनी आँख आखरी पन्ने तक हटा नहीं सका। कहानी रोमांच से भरी थी। सिंपल प्लाट और ट्विस्ट लेती हुई कहानी जिसे पढ़ना काफि इंट्रेस्टिंग रहा। जो कहानी हर रूप से अनोखी हो, उसे पढ़ने में एक अलग आनंद आता है। लेखक ने सरलता से पूरी कहानी का लेखन किया है इस किताब में।
11 reviews
February 6, 2022
हालाकि किआबें मनोरंजन के तौर पर पढ़ी जाती हैं। किताब का टाइटल पढ़ कर मुझे कहानी पढ़ने की जिग्यासा और बढ़ गयी।

कहानी एक आम लड़के की है जो अपने काम काज से बोर हो कर अपने शौक को पूरा करने फिल्म नगरी में आया। भला उसे कहाँ मालूम था की बाहर से चका चौंद से भरी चमकती हुई इस नगरी में अंदर उसे सिर्फ अंधेरा मिलेगा।

अंधेरे में घिर कर उसने कैसे खुद को पूरी तरह खो दिया और यह कहानी यानि आप-बीती सुनाई।
जी हाँ। लेखक ने अपने जीवन का बखान इस किताब में लिखा है।
पूरी कहानी या मुख्य भाग इसलिए भी नहीं बताऊंगा क्योंकि वह पाठको के साथ नाइंसाफी होगी।
काफि सारे इमोशन्स से भरी हुई किताब जिसने मुझे एक ही बार में किताब पढ़ने पर मजबूर कर दिया!
2 reviews
February 6, 2022
कभी कोई हाल बिखरा नजर आता है तो कभी कोई जाल बिछा हुआ लगता हु अब।
हाँ सर मैंने अपने डैड को मार डाला एक समकालीन कहानी है जो एक अभिनेता- अनुज टिक्कू के इर्द-गिर्द घूमती है। हमें बताया गया है कि उनका एक जटिल अतीत रहा है- जब वह छोटे थे तब उनकी मां का निधन हो गया था और वह और उनके पिता इस नुकसान से जूझ रहे थे। पूर्व यहां तक ​​कि ड्रग्स के आदी हो गए।

यह उन लोगों द्वारा प्रियजनों को छीन लिए जाने की भीषण कहानी है, जिन्होंने जीवों को जंगली जानवरों से भी बदतर बना दिया है।

हैरत अंगेज है अनुज ने इसे कैसे जिया होगा।

हालाकि, पुस्तक के साथ बहुत सारे व्याकरणिक, विराम चिह्न, वर्तनी और अन्य मुद्दे हैं जो इसे कम रेटिंग प्राप्त करने वाला बनाता है। कवर और बेहतर हो सकता था और कहानी बहुत धीमी है।
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