डिअर रीडर,लगता है आपने अकेले ही जमाने की भलाई का जिम्मा ले रखा है, लेकिन मुझे तकलीफ़ होती है जब आप जैसे भले लोगों के साथ हर रोज़ धोखे खाने की घटनाएं सुनता हूं। भई, ठीक है, आप ने किसी को मजबूर देख कर भला किया।लेकिन,दूसरे लोग तो आपका फायदा ही उठाते आ रहे हैं और ऐसा करने में उन्हें कोई शर्मिंदगी महसूस नहीं होती।किया क्या जाए?अब आप भी वैसे ही बन जाएं। जी, बिल्कुल।नहीं, बल्कि उनसे भी ज्यादा खराब।।असल में,ज़माने को उसकी औकात में रखना बहुत जरूरी हो गया है।इसके लिए क्यों न तिकड़म लगाई जाए?इस पुस्तक में पेश है, तिकड़म नीति सूत्रों का महा संग्रह।जो आपकी जिन्दगी को आसान बनाने में सहायक होंगे।रोजमर्रा के जीवन की उलझनों को दूर हटा कर, आपकी जिन्दगी मे नया बदलाव लाएंगे ये सूत्र। और &#