Jump to ratings and reviews
Rate this book

पिछड़ें क्यों मुसलमान

Rate this book
गत तीन-चार दशकों में वैश्विक मीडिया में मुस्लिम राजनीति, मुस्लिम समाज, मुस्लिम संगठन, मुस्लिम विश्वास, मुस्लिम शिक्षा और क्रिया-कलाप सब से अधिक स्थान पाते रहे हैं। इस में क्षोभ, आक्रोश, घमंड, हिंसा, आतंक, युद्ध, अन्याय, शिकायत, आंदोलन, और वाद-विवाद, हर तरह के रंग मिलते हैं। विशेषतः भारत और भारतीय उपमहाद्वीप इन सभी बातों से जुड़ा हुआ है। कुछ मामलों में तो यही क्षेत्र उन से संबंधित वैश्विक गतिविधियों के केंद्र में है। किन्तु दुर्भाग्यवश, स्वयं भारत के लोग, हिन्दू और मुसलमान दोनों, इन सभी बातों पर बहुत कम जानते हैं। इस से भी बुरी बात यह कि वे अनेक गलत धारणाओं से ग्रस्त हैं। क्योंकि विविध मुद्दों पर भ्रामक बातें और राजनीति-ग्रस्त प्रचार अधिक प्रभावशाली है। जिस की हानि न केवल भारतीय जनता, अपितु विश्व के जन-गण को भी होती रही है। यह पुस्तक उन तमाम बिन्दुओं की एक विनम्र, किन्तु सत्यनिष्ठ प्रस्तुति है। यह हमारे बौद्धिकों के बीच प्रचलित लिबरल, सेक्यूलर मत या फेथ से भिन्न है। सभी तथ्यों, तर्कों और निष्कर्षों को सदभाव एवं प्रमाण के साथ रखने का यत्न किया गया है। ताकि उन की सही-गलत की परख पाठक स्वयं कर सकें।

Paperback

First published January 1, 2020

5 people want to read

About the author

Shankar Sharan

34 books13 followers

Ratings & Reviews

What do you think?
Rate this book

Friends & Following

Create a free account to discover what your friends think of this book!

Community Reviews

5 stars
0 (0%)
4 stars
0 (0%)
3 stars
0 (0%)
2 stars
0 (0%)
1 star
0 (0%)
No one has reviewed this book yet.

Can't find what you're looking for?

Get help and learn more about the design.