इंतज़ार..! न जाने कब पूरा होगा! मेरी अधूरी कहानी का एक और नया अध्याय, यहां फिर मेरे सपने टूटेंगे, या, शायद ही पूरा होगा! सितारों की चमक है, मंजिल बहुत दूर है लेकिन! परिंदों से उड़ कर छू लूं गगन को, मजबुर हूं लेकिन! ख्वाइश मेरी..! न जाने कब पूरा होगा! थक गया हूं, क्या रुक जाऊं? उफ्फ ये कठिनाइयां, इनके सामने क्या झुक जाऊं? लेकिन, फिर से खड़ा होने की हिम्मत अब मैं लाऊं कहां से! टूट गए है अंग-अंग मेरे, मुस्कुराऊं कहां से! न साहस ही शेष है न कोई रास्ता बाकि, लेकिन दिल फिर भी जीत की उम्मीद लिए बैठा है! टूटा है हजारों दफा फिर भी, मुझ पर यकीन किए बैठा है! इसे लगता है कि मै जीत जाऊंगा। चल इसके बात पर एक और कोशिश कर लूं। जीतने की जिद्द को जेब में भर लूं। उफ्फ ये लड़ाई, चल एक और बार लड़ लूं।