“मेरा खुद का पति पहली फुर्सत मे ही मेरी जान ले लेना चाहता है...अब मैं अपनी जान बचाने के लिए उसकी जान लूँ या नहीं ? या अपनी बलि दे दूँ....राधिका के पति ने राधिका के आत्म्सम्मान को इतनी गहरी चोट दी है की आज वो न जीने की हालत मे है न मरने की.....बताओ उसके पति को उसके कर्मो की सजा मिलनी चाहिए की नहीं... शालिनी को कुछ मामूली से लड़के, न केवल जिस्मानी प्रताड़णा दे रहे है बल्कि उससे पैसो की भी लूट खसोट कर रहे है....क्या समाज के ऐसे कीड़ो को जिंदा छोडना चाहिए.....और पूनम जिसकी तुम सब इतनी बड़ी हिमायती बनी हुई हो...उसके जिस्म के घाव तो तुम सभी ने अपनी आंखो से देखे ही है...बताओ वो जानवर जीने का कौन सा अधिकार रखता है” अपर्णा एक ही सांस मे सभी के हालातो का ब्यान करती चली गई।