वक़्त के साथ अपराध करने के तौर-तरीके भी बदल गए हैं. अब डिजिटल-युग में अपराध तकनीकी की सहायता से किये जा रहे हैं. जाहिर सी बात है, कम्प्यूटर और इन्टरनेट की सहायता से किये जाने वाले अपराध बेहतर तकनीकी ज्ञान और दक्षता से ही अंजाम दिए जाते हैं. ऐसे अपराध और अपराधियों की रोकथाम दिन-प्रतिदिन दुष्कर होते जा रहा है. लेकिन अपराध आखिरकार “कागज़ की नाव” ही साबित होती है, जो बहुत देर तक, बहुत दूर तक नहीं जा सकती. सायबर वर्ल्ड में किये गए ऐसे ही एक अपराध और उसके इन्वेस्टिगेशन की कहानी है पुष्पक.
लेखक परिचय: विशी सिन्हा पेशे से एक साइबर क्राइम और बौद्धिक सम्पदा कानून विशेषज्ञ हैं. इस क्षेत्र में 14 वर्षों का कॉर्पोरेट अनुभव रखने के अलावा विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के लिए स्वतंत्र लेखन भी कर चुके हैं. पढ़ने के अलावा खेलों की दुनिया में विशेष रूचि रखने की वजह से इनके खेलों पर लिखे लेख खासा पसन्द किये जाते रहे हैं. फुटबॉल वर्ल्ड कप पर हिन्दी में उपलब्ध प्रथम और अब तक उपलब्ध एकमात्र पुस्तक - "कितने सिकंदर: वर्ल्ड कप फुटबॉल का इतिहास" लिखकर पहले भी लेखन में पहचान बना चुके हैं. प्रस्तुत पुस्तक "पुष्पक" लेखक का फिक्शन की दुनिया में प्रथम प्रयास है.