एक शापित मां जो वर्षों से अपने पुत्र के स्पर्श को पाने के तड़प रही है। अपने पुत्र के स्पर्श पाते ही वह श्राप से आजाद हो जाएगी और फिर मूर्ति बनी वो औरत फिर से जीवित हो जाएगी। एक मां, जिसने पुत्र को जन्म तो नहीं दिया लेकिन वही उसका पालन पोषण कर रही है। उसे कभी भी अपने नज़रों से दूर होने नहीं देना चाहती। कन्हैया अपने पिता के बारे में जानने के जिज्ञासु था लेकिन वह हमेशा यह कह कर टालती रही कि अभी उचित समय नहीं है। क्योंकि वह जानती थी कि सच्चाई जानने के पश्चात यकीनन वह उसे छोड़ कर चला जाएगा। लेकिन कहानी बस इतना ही नहीं बल्कि और बड़ी है। अनामिका, दैत्य राज की पुत्री धरती पर दैत्यों का साम्राज्य स्थापित करने के उद्देश्य से पहले तो वह नौजवान के साथ प्रेम करने का नाटक करती है और फिर एक निश्चित समावधि प