जो इंसान नीचे गिरता है, उसी की ऊपर उठने की भी संभावना रहती है। न्यूटन का थर्ड लॉ भी तो यही कहता है कि, ‘प्रत्येक क्रिया के समान एवं विपरीत प्रतिक्रिया होती है।’ हर कोई ऊपर नहीं उठ पाता ये अलग बात है पर इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
छोटी सी भूल के ज़रिए हम इसी संभावना की तलाश करने की कोशिश करेंगे।
ये कहानी जतिन ने 2009 में लिखी थी और तब से इसे रोमांस में एक मिसाल के रूप में देखा जाता है। आज मैं इसे आपके सामने इसके ओरिजिनल रूप में ले आया हूँ। उम्मीद है ये आपको पसंद आएगी।
**कहानी में कुछ भी कल्पना पर नहीं छोड़ा गया है. इसलिए इसे केवल वयस्क ही पढ़ें।
ये जतिन की कहाणी मैने बहोत साल पहले पढी थी, और विक्रांत भाई आपकी कहाणी भी पढी, यहा कबीर है और जतिनने वहा खुदको दिखाया है, पर मेरे खयालसे आपकी कहाणी सचमुच वासनासे और लस्टसे भरी है. जतिन की कहाणीमे पुरी कहाणी फ्लर्ट और थोडासा इंटेन्स सेक्स है, और लास्ट मे जतिनने वासनाके खेलपे जो 4,5 पन्ने लिख डाले है ना, उसमे वासना और लस्ट क्या होता है वो पन्ने पढके समज आता है.