उस दिन अमावस्या की तिथि थी । महफिल जमी हुई थी ...अमावस्या का मतलब होता है जिस रात को चंद्रमा बाहर नहीं निकलता !पूरी रात चंद्रमा के दर्शन नहीं होते । हमारे पंचांग में दो पक्ष या पखवाड़े का एक महीना माना जाता है ।जिसमें से एक को शुक्ल पक्ष और दूसरे को कृष्ण पक्ष कहा जाता है । दोनों पक्षों में 15-15 तिथियां होती है, जो प्रथमा या प्रतिपदा से प्रारंभ होती है ।शुक्ल पक्ष में तिथियों के आगे बढ़ने के साथ चंद्रमा का आकार बढ़ता जाता है । शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि को पूर्णिमा कहते हैं जिस दिन चांद अपने पूरे आकार में गोल दिखाई देता है ।पूर्णिमा के दिन का साधनाओं में भी विशेष महत्व है । इस दिन लक्ष्मी प्राप्ति से संबंधित साधनाएं विशेष फलदाई मानी जाती हैं और इसका सबसे सिद्ध मुहूर्त है शरद प