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दूसरा चेहरा

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प्राइवेट डिटेक्टिव अविनाश भारद्वाज ने जयपुर के एक होटल में हुए किसी पवन शांडिल्य नाम के शख्स के कत्ल का केस जब अपने हाथ में लिया, उस वक्त उसने सपने में भी नहीं सोचा था कि वो केस उसके गले का फंदा बन जाएगा।

एक सीधा-सादा सा दिखने वाला मर्डर केस-जिसमें पुलिस तो शुरू से ही मानकर चल रही थी कि उसने कातिल का पता लगा लिया है, बस उसे गिरफ्तार करना बाकी है-ऐसा खतरनाक साबित हुआ कि इन्वेस्टिगेशन करने आए अविनाश की ही जान के लाले पड़ गए।

...और एक अनोखी शख्सियत

एक तेजरफ्तार उपन्यास

139 pages, Kindle Edition

Published August 5, 2020

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2 stars
3 (14%)
1 star
1 (4%)
Displaying 1 - 2 of 2 reviews
22 reviews1 follower
March 27, 2021
पठनीय रचना

प्रस्तुत उपन्यास मर्डर मिस्ट्री और थ्रिलर का अद्भुत मिश्रण है। लेखक महोदय ने पूर्ववत उपन्यासों की तरह इस उपन्यास में भी एक नये तरह के पात्र को प्रस्तुत किया है।
आदि से अंत तक रोमांच से परिपूर्ण पठनीय उपन्यास ।
- गुरप्रीत सिंह, राजस्थान
www.svnlibrary.blogspot.com
Profile Image for Rajan.
637 reviews43 followers
February 20, 2021
4/5

DID. Dissociative identity disorder.

This is a good plot device. Rimjhim or Bianca? Who is she? And did she kill Pawan, brother of mafia boss?

A fast paced thriller.

हां। यही तो मैं तुम्हें बताने की कोशिश कर रहा हूं। रिमझिम काफी...काफी अलग किस्म की लड़की है।“ ''मैं समझा नहीं।“ ''जब तुम उससे मिलोगे तो समझ जाओगे। वैसे डॉक्टर मेहता ने तुम्हें उसकी मेंटल कंडीशन के बारे में तो बता ही दिया होगा।“ ''मेंटल कंडीशन?”-आनंद राव के मुंह से वो शब्द सुनते ही अविनाश को झटका-सा लगा। उसे याद आया कि दिल्ली में डॉ. मेहता के नर्सिंग होम में जब अविनाश उनकी पेशेंट रह चुकी सनाया गौतम के बारे में पूछताछ करने डॉ. मेहता से मिला था और उन्होंने अविनाश से रिमझिम का केस लेने का अनुरोध किया था तो उन्होंने रिमझिम का जिक्र भी अपनी एक पेशेंट के तौर पर ही किया था। मेंटल केस। पता नहीं उतनी महत्त्वपूर्ण बात पर मेरा ध्यान कैसे नहीं गया।-उसने मन ही मन खुद को लानत भेजी। फिर उसने ये सोचकर खुद को तसल्ली दी कि उस समय वो सनाया गौतम वाले केस में तल्लीन था। ऊपर से वो केस लगभग सॉल्व ही हो गया था तो वो उसकी सफलता से उत्साहित भी था। शायद इसी चक्कर में उसने रिमझिम के डॉक्टर मेहरा की 'पेशेंट’ होने वाली बात पर ध्यान नहीं दिया था। ''किस चीज की पेशेंट है वो?”-उसने गम्भीर स्वर में आनंद राव से पूछा। ''डीआईडी।“ ''डीआईडी?” ''डिस्सोसिएटिव आईडेंटिटी डिसऑर्डर। जिसमें आदमी कभी-कभी खुद की पहचान भूलकर अपने-आप को कोई जुदा शख्सियत समझने लगता है। कभी-कभी कोई और ही बन जाता है। जिसे आम बोलचाल में मल्टीपल पर्सनालिटी डिसऑर्डर भी कहते हैं।“ ''इतनी फैंसी बीमारी है उसे?” ''अब है तो है।“









''इसके अलावा मुझे उन कर्मचारियों से भी पूछताछ करनी है, जिन्होंने पवन शाण्डिल्य की सर्विस की थी। उसके चैक इन की एन्ट्री करने से लेकर उसका सामान सुइट में पहुंचाने वाले बैलबॉय, उसे चाय-नाश्ता, लंच वगैरह सर्व करने वाले वेटर, हर उस कर्मचारी को बुलवाइये जो पवन शाण्डिल्य के सम्पर्क में आये थे। उनसे पूछताछ करना बेहद जरूरी है।“ ''हम करते हैं प्रबंध।“-मैनेजर बुदबुदाया और मोबाइल पर किसी को कॉल करके निर्देश देने लगा। ''आप चिंता मत कीजिए”-उसके वाक्य को पकड़कर अविनाश ने सोशल मीडिया पर प्रचलित हो रहे मीम को पूरा किया-''असली कातिल के पकड़ में आते ही आपका होटल शाण्डिल्य के कहर के खतरे से आउट ऑफ कवरेज एरिया हो जायेगा।“
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