आशा है आप लोगों को मेरी नई किताब "जीने के हैं चार दिन" खूब पसंद आएगी। इस बार मैंने आप लोगों के लिए कुछ नया करने का सोचा है। जब आप कहानी पढ़ेंगे तब आप लोगों को इसका अहसास हो जाएगा। जीने के हैं चार दिन, इस वाक्य से हमें समझ आता है कि जिंदगी लंबी नही बड़ी होनी चाहिए। जीवन को अच्छे से जीने के लिए, उसके हर पल का आनंद उठाने के लिए केवल चार दिन ही काफ़ी होते हैं। इस कथा संग्रह में चार कहानियाँ हैं जो एक पुरुष के उम्र की चार अवस्थाओं को दिखाएगी। उन चार अवस्थाओं में वह केवल चार दिन में ज़िन्दगी के हसीन पल जी लेगा। इन चारों कहानियों में प्रौढ़ शब्द और अश्लील संवाद भी कूट कूट कर भरे हैं। इस कथा संग्रह में चार कहानियाँ हैं जिसमें से प्रथम एक सोशल मीडिया वाली भाभी और उसके पड़ोसी देवर पर आधारित है। चौथी कहानियाæ