कहने को नैतिक और अनैतिक मे केवल एक अक्षर का अंतर हे. लेकीन यही एक अक्षर समाज के नजरिए को बदलने के लिए पर्याप्त है. इसी एक अक्षर पर आधारित है यह कहानी. यह कहानी है दो पीढ़ियों के संघर्ष की. जहा एक तरफ अपने आदर्श पर चलने वाले बुजुर्ग है तो दूसरी तरफ अपनी ही मस्ती में खोई हुई जवानी.इस जवानी को समाज की कोइ फिक्र नहीं.इस जवानी को परिणामों की कोई फिक्र नहीं.यह पीढ़ी अपने ही मनमुताबिक नियम बनाती है और अपने इच्छा, आकांक्षाओं के पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है.मुझे उम्मीद है प्यार, रोमांस,सस्पेंस, क्राइम और थ्रिल से भरपुर यह कहानी आपको जरूर पसंद आएगी.******************************************नमस्कार पाठको,"में आपकी प्रियांशी जैन ! मेंरी सभी कहानियो को इतना प्यार देने के लिए आपका शुक्रिया.मेरी उम्मीद से ज्यादा आप लोगो ने मेरी कह