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काला साया

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एडवोकेट गिरिराज वर्मा समाज में बेहद प्रतिष्ठित, सम्मानित व्यक्ति के रूप में जाना जाता था। लोग उसके आदर्श चरित्र की मिसालें देते नहीं थकते थे।

लेकिन जब एक रात उसी के घर में, बेहद रहस्यमयी ढंग से उसकी हत्या हो गई तो ऐसे-ऐसे चौंकाने वाले राज सामने आए कि लोग हैरान रह गए।

कौन थी सनाया गौतम, गिरिराज वर्मा ने मरने से पहले-या यूं कहें कि मारे जाने से पहले-अपनी पूरी जायदाद जिसके नाम कर दी थी।

क्या अधेड़ावस्था में एकाकी जीवन बिता रहे गिरिराज वर्मा को अपने जीवन में ‘चीनी कम’ लगने लगी थी, जिसके चलते उसने अपने सिद्धांतों से समझौता कर लिया था?

या वो ऐसी जहरीली नागिन के जाल में फंस गया था, जिसके जहर का कोई तोड़ नहीं था।

या फिर गिरिराज वर्मा पर सचमुच किसी चुडै़ल का काला साया था?

जानने के लिए पढ़ें एक तेजरफ्तार मर्डर मिस्ट्री




'काला साया'

276 pages, Kindle Edition

Published April 14, 2020

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Displaying 1 - 2 of 2 reviews
Profile Image for Rajan.
637 reviews43 followers
February 18, 2021
वहां आसपास रहने वाले लोगों के माध्यम से पुलिस को पता चला कि करीब साल भर से एक नौजवान युवती गिरिराज वर्मा के घर में रह रही थी। वो एक बेहद पॉश इलाका था, जिसमें कई घर नए बने थे। अपने पड़ोसियों के साथ गिरिराज वर्मा का कोई विशेष उठना-बैठना नहीं था, जिसके चलते उस इलाके में उनका घर होते हुए भी घर के अंदर क्या हो रहा है, इसकी जानकारी किसी को नहीं थी। वैसे भी परिवार के नाम पर भी उनके यहां कोई नहीं था और करीब साल भर से गिरिराज वर्मा ने लोगों के यहां आना-जाना भी बेहद कम कर दिया था, जो किसी तरह के फैमिली गेट-टुगेदर में ही लोगों के बीच उठना-बैठना होता, जान-पहचान बनती। यहां तक कि किसी घर में होने वाले फंक्शन आदि के लिए भी उनको बुलावा आता था तो वे तबीयत खराब होने या कोई अन्य जरूरी काम होने का बहाना बना कर टाल जाते थे। ऐसे पॉश इलाकों में वैसे भी आस-पड़ोस में जान-पहचान न होना एक सामान्य-सी बात ही समझी जाती है। लोग सोशल मीडिया पर हजारों किलोमीटर दूर बैठे लोगों को दोस्त बना लेते हैं लेकिन उन्हें ये पता नहीं होता कि उनके पड़ोस में कौन रह रहा होता है? गिरिराज वर्मा के ‘आस-पड़ोस’ के मामले में भी कुछ ऐसा ही था। लेकिन ये नियम घर में काम करने वालों, दूध वाले, अखबार वालों आदि पर लागू नहीं होता है। अमीर लोग जहां अपनी दौलत से संतुष्ट होकर अपने-आप में सीमित होने की कोशिश करते हैं, नई जान-पहचान बनाने में सावधानी बरतते हैं और अपनी रिश्तेदारी और जितनी जान-पहचान होती है, उसी में संतुष्ट रहते हैं, वहीं गरीब लोगों के लिए ये जान-पहचान ही उनकी दौलत होती है। घरेलू नौकर, माली, हॉकर आदि श्रमजीवी कम आय वर्ग के लोग एक-दूसरे से पहचान बना कर रखते हैं, जिससे वक्त-जरूरत पर एक-दूसरे के काम आ सकें।







जैसे-जैसे पुलिस आगे जांच करती रही, वैसे-वैसे पुलिस के सामने ये बात साफ होती गई कि सनाया गौतम के चुड़ैल होने की वो अफवाह कोई एकदम से नहीं उड़ी थी। वो घर काफी समय से वीरान पड़ा था और ऐसे घरों को लोग आम तौर पर भूत-बंगले का तमगा दे दिया करते हैं। कई सालों से खाली पड़े उस घर को करीब साल भर पहले ही गिरिराज वर्मा ने खरीदा था लेकिन जिस प्रकार वे रहस्यमयी ढंग से उस घर में रहते रहे, उससे उस घर से जुड़ी भूत-प्रेत, चुड़ैल सम्बंधी अफवाहें लोगों को और भी ज्यादा विश्वसनीय लगने लगीं। खास तौर पर उस लडक़ी को लोग काफी रहस्यमयी मानते थे, जो कि उस घर में गिरिराज वर्मा के साथ रहती तो थी लेकिन बहुत कम ही दिखाई देती ...
Profile Image for Om Singh.
17 reviews1 follower
July 1, 2020
बढ़िया कथानक पर थ्रिल कम

जबरदस्त शुरुआत और बढ़िया अंत..... अब और क्या चाहिए...प्लॉट बढ़िया है पर थोड़ा जज्बाती है...गिरिराज और शनाया का चरित्र पूरी तरह से उभर नहीं पाया... घटनाओं मे कमीं, रोमांच मे भी कमी पर ठीक ठाक...
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