वहां आसपास रहने वाले लोगों के माध्यम से पुलिस को पता चला कि करीब साल भर से एक नौजवान युवती गिरिराज वर्मा के घर में रह रही थी। वो एक बेहद पॉश इलाका था, जिसमें कई घर नए बने थे। अपने पड़ोसियों के साथ गिरिराज वर्मा का कोई विशेष उठना-बैठना नहीं था, जिसके चलते उस इलाके में उनका घर होते हुए भी घर के अंदर क्या हो रहा है, इसकी जानकारी किसी को नहीं थी। वैसे भी परिवार के नाम पर भी उनके यहां कोई नहीं था और करीब साल भर से गिरिराज वर्मा ने लोगों के यहां आना-जाना भी बेहद कम कर दिया था, जो किसी तरह के फैमिली गेट-टुगेदर में ही लोगों के बीच उठना-बैठना होता, जान-पहचान बनती। यहां तक कि किसी घर में होने वाले फंक्शन आदि के लिए भी उनको बुलावा आता था तो वे तबीयत खराब होने या कोई अन्य जरूरी काम होने का बहाना बना कर टाल जाते थे। ऐसे पॉश इलाकों में वैसे भी आस-पड़ोस में जान-पहचान न होना एक सामान्य-सी बात ही समझी जाती है। लोग सोशल मीडिया पर हजारों किलोमीटर दूर बैठे लोगों को दोस्त बना लेते हैं लेकिन उन्हें ये पता नहीं होता कि उनके पड़ोस में कौन रह रहा होता है? गिरिराज वर्मा के ‘आस-पड़ोस’ के मामले में भी कुछ ऐसा ही था। लेकिन ये नियम घर में काम करने वालों, दूध वाले, अखबार वालों आदि पर लागू नहीं होता है। अमीर लोग जहां अपनी दौलत से संतुष्ट होकर अपने-आप में सीमित होने की कोशिश करते हैं, नई जान-पहचान बनाने में सावधानी बरतते हैं और अपनी रिश्तेदारी और जितनी जान-पहचान होती है, उसी में संतुष्ट रहते हैं, वहीं गरीब लोगों के लिए ये जान-पहचान ही उनकी दौलत होती है। घरेलू नौकर, माली, हॉकर आदि श्रमजीवी कम आय वर्ग के लोग एक-दूसरे से पहचान बना कर रखते हैं, जिससे वक्त-जरूरत पर एक-दूसरे के काम आ सकें।
जैसे-जैसे पुलिस आगे जांच करती रही, वैसे-वैसे पुलिस के सामने ये बात साफ होती गई कि सनाया गौतम के चुड़ैल होने की वो अफवाह कोई एकदम से नहीं उड़ी थी। वो घर काफी समय से वीरान पड़ा था और ऐसे घरों को लोग आम तौर पर भूत-बंगले का तमगा दे दिया करते हैं। कई सालों से खाली पड़े उस घर को करीब साल भर पहले ही गिरिराज वर्मा ने खरीदा था लेकिन जिस प्रकार वे रहस्यमयी ढंग से उस घर में रहते रहे, उससे उस घर से जुड़ी भूत-प्रेत, चुड़ैल सम्बंधी अफवाहें लोगों को और भी ज्यादा विश्वसनीय लगने लगीं। खास तौर पर उस लडक़ी को लोग काफी रहस्यमयी मानते थे, जो कि उस घर में गिरिराज वर्मा के साथ रहती तो थी लेकिन बहुत कम ही दिखाई देती ...