इस कहानी के मुख्य पात्र संतोष और प्रिया हैं, प्रिया संतोष की पत्नी का नाम है जो बहुत ही खूबसूरत होती है। संतोष और प्रिया का रिश्ता पवित्र है, वह रिश्ता ऐसा नहीं है जैसा आज-कल देखने को मिलता है कि लड़का-लड़की एक समय तक ही साथ रहते हैं।बचपन से संतोष ऐसे बहुत से लोगों से मिलता है जिनकी नजर में रिश्तों का मतलब कुछ और ही होता है, उसके दोस्त भी उससे कहते हैं कि हम तो बस लड़की से मजे लेते हैं और वो भी उससे पूछ के। यह किताब यह सीख देती है कि कोई भी रिश्ता मात्र खेल नहीं होता जो कुछ देर तक चले फिर खत्म हो जाए, लडकियां कोई खिलौना नहीं होती, सच्चा प्यार और सच्चे दोस्त आज-कल की दुनिया में भी मिलते हैं।