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झूठ की परत

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बलात्कार/ रेप शब्द इतना भयावह है कि इसकी कल्पना मात्र ही लोगों के रोंगटे खड़े करने के लिए काफी है | इस समय जब हर दूसरे दिन हम एक के बाद एक ऐसी घटनाओं के बारे में सुन रहे हैं, तो इसके लोगों के जीवन पर प्रभाव के बारे में सोचना आवश्यक हो जाता है | कैसा लगेगा जब एक माँ अपनी बेटी को ये बताए कि उसका जन्म एक बलात्कार के कारण हुआ है ? कैसा होगा उस बेटी का जीवन जब उसे पता चलेगा कि उसका अस्तित्व इतनी भयंकर घटना पर आधारित है ? क्या वो दूसरे लोगों की तरह एक साधारण जीवन जी पाएगी ? क्या कोई परिवार ऐसी लड़की को अपने परिवार की बहू स्वीकार करेगा ? "झूठ की परत" की मुख्य पात्र रक्षा अपने जीवन में इन्हीं समस्याओं से जूझती दिखाई देती है |

62 pages, Kindle Edition

Published June 18, 2019

About the author

Pratyasha Nithin

3 books4 followers
Pratyasha Nithin is a budding writer and a self-taught artist currently residing in Mysore, India. She has written articles and blog-posts on women’s issues. She is passionate about story-telling and believes that it is a powerful medium to convey ideas and ideals. She regularly contributes short stories (Hindi & English) to Pragyata magazine.

प्रत्याशा नितिन धर्म सम्बन्धी कहानियां लिखना पसंद करती हैं | उनका उद्देश्य ऐसी कहानियां लिखने का है जो लोगों को अपनी जड़ों से वापस जोड़ सकें एवं उनके मन में भक्ति भाव जागृत कर सकें |

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July 2, 2019
" गद्यं कवीनां निकषं वदन्ति " गद्य को कवि की कसौटी कहा गया है क्योंकि अच्छा गद्य लेखक ही अपने विचारों की अभिव्यक्ति सरल और मधुर भाषा में इस प्रकार करता है किं वह प्रभावपूर्ण हो उठती है।
" *झूठ की परत* " ये कहानी कि लेखिका *श्री प्रत्याशा नितिन* जी के द्वारा सत्य को समर्पित इस कहानी में अपने विचारों को एक व्यवस्थित क्रम में तथा तर्कपूर्ण ढंग से सत्य को उजागर किया है। इसे पढ़ते हुए लगा कि सत्य का अन्वेषण और उसका स्विकार करना कठिन है, पर ये अनैको के जीवन में खुशियां लाता है।
*झूठ की परत* पढ़कर मुझे *श्रीहजारी प्रसाद द्विवेदी* जी गद्य किसे कहते है इस पर उनका उद्धरण याद आ रहा है ये कहानी पढ़कर ये सब प्रकार के दोष को हम दूर कर सकते हैं, वे कहते हैं " *जिस पुस्तक से यह उद्देश्य सिद्ध नहीं होता,जिससे मनुष्य का अज्ञान,कुसंस्कार,और अविवेक दूर नहीं होता,जिससे मनुष्य शोषण और अत्याचार के विरुद्ध सिर उठाकर खड़ा नहीं हो जाता, जिससे वह छिना-झपटी, स्वार्थपरता और हिंसा के दलदल से उबर नहीं पाता, वह पुस्तक किसी काम की नहीं*"
*श्रीप्रत्याशा नितिन* जी के द्वारा बहोत ही सटीक रूप से ये कहानी को लिखा गया हैं। दोषको उजागर करने वाली और सत्य को प्रगट करने वाली कहानी हैं।
बहुशः धन्यवाद श्रीप्रत्याशा नितिन जी को।
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