क्रेमर को पुरानी मूर्तियों को संग्रह करने का शौक था । जब उसे पता चला कि एक दुर्गम चीनी शहर में कुछ दुर्लभ मूर्तियां उपलब्ध थीं तो वो अपने शौक को पूरा करने की खातिर, प्रमोद के लाख मना करने के बावजूद, वहां जाने के लिये तैयार हो गया । प्रमोद को भी मुलाहजे में उस सफर पर क्रेमर का साथ देना पड़ा । और फिर शुरू हुआ एक ऐसा सफर जो कुएं में छलांग मारने के समान था, मौत का सफर था ।
Surender Mohan Pathak, is an author of Hindi-language crime fiction with 314 books to his credit. His major characters are Crime reporter Sunil (unprecedented 123 Titles), Vimal (46 Titles) and Philosopher Detective Sudhir (23 titles). Apart from series, he has written 60+ Novels in thriller category.
कहानी तो बढ़िया लग रही थी लेकिन लेखक कोई तालमेल नहीं बिठा पाए. लिजा अपने पिता से प्रमोद को क्यों मिलवाने के लिए तैयार हुई औऱ फिर लिऊ की बातें प्रमोद क्यों मानने लगा???
मेरे तो कुछ भी पल्ले नहीं पड़ा, बहुत ही बुरा अनुभव बकवास 👎👎👎
Promod is a good carrecter, but because it is one of starting book of patakh sir.बाकी का मतलब एक शेर से समझीये "लिखते लिखते आएगा लिखने का फन उन्हें ,बच्चे खराब करते हैं कुछ कापियां जरूर। so .moral of this now he is the best writer because practice makes a man perfect.
बच्चों के उपन्यासों जैसी कहानी है। कुछ नयापन नहीं है। शायद पाठक साहब का शुरुआती उपन्यास होने की वजह से ऐसा हुआ हो। कहानी में बिल्कुल भी ट्विस्ट नहीं है। एक सीधे रास्ते पर ही कहानी आगे बढ़ती है और ख़त्म हो जाती है। कोई थ्रिल नहीं है। अगर आप पाठक साहब के डाई हार्ड फेन है तो ही इसे पढें।
A very simple story and quiet a dull read. This may be because Pathak saab is introducing a new character , but unable to come out of Sunil's influence. At least in this book Parmod is neither here nor there kind of a character.