"जीवन के अनसुलझे रहस्य" लेखक श्रीमान मनिषजी द्वारा लिखित बहुत ही उम्दा पुस्तक हैं।जैसा कि पुस्तक का शीर्षक है,सच मे यह जीवन के अनसुलझे रहस्यों से रूबरु करवाती हैं और उन रहस्यों की गुत्थी सुलझाने मे मदद भी करती हैं। हर मनुष्य का मस्तिष्क पटल सुख और दुःख रूपी पता नहीं कितने ही जंजालों से भरा रहता है, उन्हीं जंजालों के उलझे पङे धागों को सुलझाने का प्रयास लेखक ने इस पुस्तक के माध्यम से किया है।आजकल की भागदौड भरी जिंदगी मे धन,सुविधाएं पाने की जद्दोजहद मे मनुष्य भागता रहताहै्,और अंततः सब यही छोड़ कर चला जाता हैं तो किस तरह से इस भागदौड के बीच जीवन मे सकारत्मकता लाए,आत्म साक्षात्कार हो,जीवन मृत्यु और ईश्वर के परम सत्य को जाने उसको बहुत उम्दा तरीक़े से बताया गया है।ध्यान क्यों जरूरी है, कैसे कर सकते है विस्तृत वर्णन किया गया है तभी पाठक को भी समझ आता है कि मस्तिष्क रूपी समुद्र मे आने वाले सुख दुःख रूपी विचारों के भंवर को एक इंसान ध्यान रूपी कश्ती मे सवार होके ही आराम से पार कर सकता हैं।"दो शब्द" प्रसंग मे "कुछ"पाने की लालसा मे "बहुत कुछ " खो देता हैं, इस संकल्पना को सहज रूप से प्रस्तुत किया गया है।"पुस्तक की आवश्यकता क्यों है।" प्रसंग मे बहुत ही सरल तरीकें से इस आवश्यकता को समझाया गया है।पुस्तक की सबसे बात यह है कि लेखक ने बहुत ही बारिकी के साथ पुस्तक के हर पन्ने को अपने शब्दों से अलंकृत किया है, तभी तो पुस्तक की बातो को पाठक अपने आप से जोड़ पाता है और जीवन मृत्यु, ध्यान ,स्वप्न प्रक्रिया और ईश्वर की उत्पत्ति, स्वरूप, ईश्वर भय का नियम क्यों बुद्धि जीवी लोगों ने बताया है,मंत्रों,पूजा ईश्वर की उपासना कैसे सकरात्मकता लाती हैं।ऐसी बहुत सी चीजें है जिनके बारे मे जान कर अच्छा लगा,ऐसा लगा कि रोजमर्रा की जिंदगी में कहीं ना कहीं ये चीजें महसूस की है ,और लेखक महोदय ने पुस्तक की विषय वस्तु को इस तरह से प्रस्तुत किया है कि शुरू से अंत तक पाठक का उत्साह बनाये रखती है,क्योंकि आपने हर बात को डायग्राम्स,उदाहरणों, पंक्तियों,कविताओं के माध्यम से समझाया है जो कि पुस्तक के विषय को मंनोरंजक बनाती हैं।एक चीज लगी कि पुस्तक के अंत मे दिए गए शब्दकोश मे और भी कठिन शब्द शामिल हो सकते हैं या हर पन्ने के नीचे अगर उस पन्ने मे कोई कठिन शब्द है तो उसका अर्थ शामिल कर के पाठक के पढने की राह को आसान बनाया जा सकता हैं।
अंततः एक पाठक के रूप में पुस्तक को पढना बहुत ही सार्थक लगा,सकरात्मक ऊर्जा का अनुभव हुआ और कई नई चीजों की जानकारी प्राप्त हुई।मेरे हिसाब से हर उम्र के लोगों को यह पुस्तक पढनी चाहिए, यह पुस्तक कभी भी आपके फुर्सत के पलों मे चार चांद लगा सकती हैं।लेखक ने पुस्तक के इस तरह के विषय को भी काफी रुचिकर बनाया हैं।
धन्यवाद और बधाई के पात्र है लेखक महोदय, जिन्होंने इस विषय पर और इस तरह से लिखा है जो समाज मे समरसता स्थापित करने और मानवीय समाज को एक नई दिशा की ओर अग्रसर करने मे मदद करता है।और यह पुस्तक पाठक को ये संदेश देती हैं:-
"ध्यान, योग है वो वरदान।
बिमारियों रूपी समस्याओं का यह समाधान।।"
"जीवन की भागदौड़ मे क्या रखा है, सब है मोह माया।
ईश्वर का ध्यान लाती सकारात्मक ऊर्जा, संवारती कंचन काया।। "