मानवीय संवेदना और सरोकारों से सराबोर ये पठनीय कहानियाँ ‘‘आप सचमुच जानना चाहती हैं?’’ मैं उसकी आँखों में झलकती दर्द की परछाइयों के बीच कुछ खोज रही थी। ‘‘कहीं आपकी हमदर्दी कम तो न हो जाएगी! मेरा बेटा था वह।’’ ‘‘ओह? अच्छा। तो...?’’ ‘‘अफ्रीकी-अमेरिकन से शादी की थी। मेरे साथ कॉलेज में थी। बहुत प्यार था हमारा। हमारे प्यार की संतान था वह!’’ निःशब्द थी मैं। ‘‘कैसे सहा होगा दोनों ने। एक मात्र संतान को इस तरह खो देना। एक बेकसूर, निर्दोष बच्चे का पुलिस के हाथों बलि चढ़ जाना!’’ ‘‘अफसोस है मुझे। इतना कुछ घट गया आपके साथ, और आपकी पत्नी! ‘‘हाँ मेरी पत्नी!’’ उसने भरे गले से आह भरी। लगा अभी फूट पड़ेगा। उसे अपना दर्द सँभालना बेहद मुश्किल हो रहा था। ‘‘वह...वह...’’ और उससे आगे उसके मुख से कोई शब्द नहीं निकला। वह खामोश जमीन पर आँख गड़ाए बैठा रहा। मेरी हिम्मत नहीं पड़ी कि उससे आगे कोई सवाल पूछूँ। ‘‘पगला गई थी वह!’’
—इसी संग्रह से मानवीय संवेदना और सरोकारों से सराबोर ये पठनीय कहानियाँ पाठक के मन-मस्तिष्क को छू लेंगी।
उपन्यासकार एवं लघुकथा लेखिका सुषम बेदी का जन्म फिरोजपुर (पंजाब) में हुआ। दिल्ली विश्वविद्यालय से एम.ए. करने के पश्चात उन्होंने पी.एच.डी पंजाब विश्वविद्यालय से की और उनका शोध का विषय था- “हिन्दी नाट्य प्रयोग के सन्दर्भ में”। उन्होंने 1978 से लिखना प्रारम्भ किया। अब उनका नाम समकालीन कथा और उपन्यास लेखन में जाना-माना नाम है। उनके अधिकतर उपन्यास पश्चिमी जगत के प्रवासी भारतीयों के अनुभव, परिस्थितियों, अनुभवों और अंतरद्वंद्वों को व्यक्त करते हैं। उन्होंने उन्होंने एम.ए.(दिल्ली विश्वविद्यालय) और पी.एच.डी पंजाब विश्वविद्यालय से की। सुषम बेदी हिन्दी को अतिरिक्त पंजाबी, अंग्रेज़ी, फ्रैंच, उर्दू और संस्कृत भाषाओं का धाराप्रवाह ज्ञान है।
1975 तक दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन के पश्चात अपने पति के साथ ब्रस्सलज़ (बेलजियम) चली आयीं और वहाँ रहते हुए “टाईम्स ऑफ़ इंडिया” की संवाददाता बनीं। 1979 में यू.एस.ए. में प्रवास करने के पश्चात कोलम्बिया विश्वविद्यालय में हिन्दी भाषा एवं साहित्य का अध्यापन आरम्भ किया और अब भी वही कर रही हैं।
सुषम बेदी की पहली कहानी “कहानी” नामक पत्रिका में 1978 में प्रकाशित हुई। अमेरिका आने के पश्चात वह कई उपन्यास लिख चुकी हैं। जैसे कि- हवन (1989); लौटना (1992); क़तरा दर क़तरा (1994); चिड़िया और चील- लघु कथा संग्रह (1995); इतर (1998); गाथा अमरबेल की (1999); नवभूम की रस-कथा (2001)। उनकी अनेक कृतियों का अनुवाद कई भाषाओं में हो चुका है।
सुषम बेदी का सम्बन्ध रंगमंच, आकाशवाणी एवं दूरदर्शन पर अभिनेत्री के रूप में भी रहा है।
सुषम जी की प्रमुख रचनाएँ इस प्रकार हैं
प्रमुख कृतियाँ
उपन्यास- हवन, लौटना, नवाभूम की रसकथा, गाथा अमरबेल की, कतरा दर कतरा, इतर, मैंने नाता तोड़ा, पानी केरा बुदबुदा तथा मोर्चे। कहानी संग्रह- चिड़िया और चील, सड़क की लय और अन्य कहानियाँ, तीसरी आँख, यादगारी कहानियाँ। निबंध संग्रह- हिंदी भाषा का भूमंडलीकरण, आरोह-अवरोह, कविता संग्रह- शब्दों की खिड़कियाँ, इतिहास से बातचीत आलोचनात्मक कृतियाँ- हिंदी नाट्य प्रयोग के संदर्भ में, भाषा शिक्षण से जुड़ी विविध सामग्री अंग्रेजी में प्रकाशित।