'सपनों की होम डिलीवरी' नये जमाने के करवट बदलते रिश्तों को केंद्र में रखकर लिखा गया उपन्यास है। रिश्ता चाहे पति पत्नी का हो, माता-पिता और संतान का हो या प्रेमी-प्रेमिका का; ईमानदारी से देखें तो हर रिश्ता नये वक्त के साथ ताल बिठाने की कोशिश कर रहा है। दोष किसी का नहीं है, शायद हर युग अपने सामाजिक संजाल को ऐसे ही बदलता होगा।
उपन्यास की नायिका रूचि एक असफल विवाह से निकलकर अपनी खुद की पहचान अर्जित करती है। दूसरी तरफ सर्वेश है। वह बभी अपने पहले विवाह से बाहर आ चुका है। दोनों का अपना एक-एक बच्चा भी है। और संयोग कि रूचि का अपना बेटा पारिवारिक टूटन के कारण जिस खतरनाक रास्ते पर जा रहहाई उसी रास्ते पर चलता हुआ सर्वेश का बेटा पहले ही जीवन से हाथ धो चुका है। यही बिंदु इन दोनों के निजी स्पेस को स्थायी रूप से जोड़कर एक नया, बड़ा स्पेस बनाता है।
Mamta Kalia (born 2 November 1940) is an Indian author, teacher, and poet, writing primarily in the Hindi language. She won the Vyas Samman, one of India's richest literary awards, in 2017 for her novel Dukkham Sukkham (Sadness and Happiness)
3.5/5 उपन्यास शुरू से लेकर आखिर तक पठनीय है। आज के जीवन के कई पहलुओं को छूता यह उपन्यास अंत तक अपनी रोचकता बरकार रखता है। उपन्यास खत्म होने पर आपको सोचने के लिए भी कई मुद्दे दे देता है। अगर आपने इसे नहीं पढ़ा है तो आपको पढ़ना चाहिए। मेरी विस्तृत राय आप निम्न लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं: सपनों की होम डिलीवरी