व्योमालय राज्य के राजकुमार श्रीतनय अपने युवराज्याभिषेक के कुछ दिवस पूर्व अकस्मात लुप्त हो जाते हैं | महाराज उमातनय अपने पुत्र के इस प्रकार लुप्त हो जाने पर राज्य मंत्रियों को सौंपकर वन चले जाने का निर्णय ले लेते हैं | राजकुमार के अंगरक्षक भीमसेन अपने मित्रसमान श्रीतनय की लुप्तता के पीछे का रहस्य जानने के लिए एक रात्रि राजकुमार के कक्ष में अन्वेषण के लिए जाते हैं | परन्तु वहाँ एक ब्राह्मण को देख वो आश्चर्यचकित रह जाते हैं | कौन है यह ब्राह्मण ? कैसे बिना किसी को ज्ञात हुए वह राजकुमार के कक्ष पहुँच गया ? उसके व्योमालय आने के पीछे का उद्देश्य क्या है ? क्या उसका राजकुमार के विलुप्त होने में कोई हाथ है ? क्या राजकुमार कभी वापस आयेंगे ? क्या व्योमालय को उसका भावी युवराज वापस मिलेग
Pratyasha Nithin is a budding writer and a self-taught artist currently residing in Mysore, India. She has written articles and blog-posts on women’s issues. She is passionate about story-telling and believes that it is a powerful medium to convey ideas and ideals. She regularly contributes short stories (Hindi & English) to Pragyata magazine.
प्रत्याशा नितिन धर्म सम्बन्धी कहानियां लिखना पसंद करती हैं | उनका उद्देश्य ऐसी कहानियां लिखने का है जो लोगों को अपनी जड़ों से वापस जोड़ सकें एवं उनके मन में भक्ति भाव जागृत कर सकें |
अत्यंत मनोरंजक एवं शिक्षाप्रद लघुकथा। लघु होने पर भी यह कहानी एक भरी-पूरी पौराणिक कथा जैसा आभास देती है। भगवान गणेश जी के उग्र रूप का सजीव चित्रण भी है। लेखिका से ऐसी अन्य और कथाएं अपेक्षित हैं। एक भरा-पूरा उपन्यास हो तो और भी अच्छा।