एक दीवाली श्रीराम लक्ष्मण, सीता, हनुमान सहित अयोध्या पधारने का निर्णय लेते हैं। राम मंदिर निर्माण विषय पर चारों महानुभाव विमर्श करते हैं और अंततः श्रीराम एक उत्कृष्ट समाधान करते हैं।
लेखक ने आपने अपने राजनीतिक विज्ञान की समझ से 'आधुनिक राम लक्ष्मण संवाद' को रोचक और प्रभावशाली बना दिया है। संवाद में श्री राम स्वयं संविधान की आत्मा के प्रतीक बन गए हैं और हनुमान इसके प्रहरी। यहाँ श्री राम विधायिका के प्रतीक हैं तो हनुमान सर्वोच्च न्यायालय के। सीता और लक्ष्मण आशंका एक सुधि भक्त की है। और जिसका समाधान भी इसी संवाद से होता है। आज देश की जो राजनीतिक दशा है उसमें इसी संवाद की कमी है।
श्री राम भारतीय संविधान के अनुरूप आधुनिक भारत की कल्पना करते हैं। संवाद के लिए इतने सूत्रों को जोड़ना खुद से संवाद करने जैसा है। श्री राम का यह कहना, कि भारत के इतिहास से अलग इतिहास अयोध्या का नहीं हो सकता। यह लेखक की अद्भुत कल्पना शक्ति का स्वयं श्री राम से संवाद है। पूस्तक रोचक, विचारोतेजक और एक ही सांस में पढनीय है।