क्या होगा अगर आपकी आँख खुले और आप पर लग जाये एक हत्या का इल्जाम। वह भी एक फिल्मस्टार, एक हीरोइन की हत्या का इल्जाम। साथ में अगर आपको कुछ भी याद न हो तो?....कुछ ऐसा ही होता है यश खांडेकर के साथ। फिल्मी दुनिया की चकाचौंध के साथ-साथ उसके काले पहलुओं से रूबरू होते हुए, थ्रिल और सस्पेंस के एक ऐसे तेज रफ्तार सफर पर आप निकलेंगे जहाँ पल-पल खतरा है...कौन अपना है..कौन दुश्मन..कहना मुश्किल है। यश खांडेकर को अपनी जान बचाने के लिए हीरोइन के हत्यारे को ढूंढ निकालना होगा...लेकिन उसे बचना है पुलिस की तेज तर्रार टीम और एक प्रोफेशनल किलर से....कौन है वो प्रोफेशनल किलर?..किसके इशारे पर वह यश की जान लेना चाहता है?.. क्या यश असली कातिल को बेनकाब कर सकेगा या उसकी किस्मत में फांसी के फंदे पर झूलना लिखा है? हर पल सस्पेंस का ऐसा पैनापन जो आपको नॉवल खत्म करे बिना चैन नहीं लेने देगा।
5 स्टार इसलिए क्योंकि यह अपराध कथा (क्राइम फिक्शन) की दुनिया में एक नए लेखक की कृति है और मेरा मानना है कि मैं प्रोत्साहित करना पसंद करूँगा।
लेखक ने कहानी का जो प्लाट चुना वह आरंभ में मुझे अजीब सा लगा। लगा जैसे कि कोई फिल्मी कहानी है लेकिन ज्यों ज्यों कहानी परवान चढ़ने लगी त्यों त्यों एहसास होने लगा कि लेखक के लेखन में परिपक्वता भी है।
सस्पेंस और थ्रिल दोनों ही कहानी में भरपूर लगे वहीं मिस्ट्री का तत्व कमजोर सा लगा। कहाँ कहाँ कमजोर था यह अब मुझे याद नहीं।
लेखक ने कहानी को यथार्थ के धरातल पर लिखा है और यही इस कहानी की usp है। हो सकता था कि कहानी का नायक अकेले ही सब कुछ कर लेता लेकिन हेल्पिंग हैंड्स का इस्तेमाल करते हुए लेखक ने कहानी को फिल्मी रूप देने से भरपूर बचाया।