वायुपान क्रिया आत्म-सम्बोधि की एक प्राचीन प्रक्रिया है ।
इस ग्रन्थ का उद्देश्य जनमानस को एक अत्यन्त ही सरल एवं प्रभावशाली वायुपान (सामान्य श्वसन-प्रक्रिया से भिन्न) क्रियाभ्यास के लिए प्रेरित करना है । यह क्रिया मधुमेह (टाइप १ एवं २) के पूर्ण उन्मूलन के साथ साधक को स्वस्थ मन एवं निरोगी काया प्रदान करते हुए दीर्घजीवी अवस्था प्रदान करता है । प्राचीन क्रिया योग संस्थान प्राचीन जीवन विज्ञान शैली को सरलता एवं सुगमता से प्रदर्शित एवं पारदर्शित करने हेतु कटिबद्ध है ।
इन सरल विधियों को साधक स्वयं ही आत्मनिर्देशन एवं अन्तःस्फुरण से सम्पादित कर सकता है ।
इस स्थूल काया का अस्तित्व एकमात्र ध्यान प्रक्रिया के सम्पादन हेतु है। इसके अतिरिक्त जीव नगण्य एवं रिक्त है।