Jump to ratings and reviews
Rate this book

Shabdon Ka Safar : Vol. 1

Rate this book
शब्दों का सफर अजित वडनेरकर का विस्तृत विवेचन कतिपय शब्दों के इन्हीं जन्मसूत्रों की तलाश है। यह तलाश भारोपीय परिवार के व्यापक पटल पर की गई है, जो पूर्व में भारत से लेकर पश्चिम में यूरोपीय देशों तक व्याप्त है। इतना ही नहीं, अपनी खोज में उन्होंने सेमेटिक परिवार का दरवाज़ा भी खटखटाया और ज़रूरत पड़ने पर चीनी एकाक्षर परिवार की देहलीज़ को भी स्पर्श किया। उनका सबसे बड़ा प्रदेय यह है कि उन्होंने शब्दों के माध्यम से एक अन्तर्राष्ट्रीय बिरादरी का धरातल तैयार किया, जिस पर विभिन्न देशों के निवासी अपनी भाषाओं के शब्दों में ध्वनि और अर्थ की विरासत सँजोकर एक साथ खड़े हो सकें। पूर्व और पश्चिम को अब तक ऐसी ही किसी साझा धरातल की तलाश थी। व्युत्पत्ति-विज्ञानी विवेच्य शब्द तक ही अपने को सीमित रखता &#

864 pages, Kindle Edition

Published January 1, 2011

1 person is currently reading
15 people want to read

About the author

Ajit Wadnerkar

8 books1 follower

Ratings & Reviews

What do you think?
Rate this book

Friends & Following

Create a free account to discover what your friends think of this book!

Community Reviews

5 stars
0 (0%)
4 stars
0 (0%)
3 stars
0 (0%)
2 stars
0 (0%)
1 star
0 (0%)
No one has reviewed this book yet.

Can't find what you're looking for?

Get help and learn more about the design.