इधर मोहित तो मारे तलब के बावला हो रहा है, वज़ीर को पाने की तलाश में उसका अंग अंग फड़क रहा है। उसकी चटकती चिकनी बॉडी आज घर्षण के लिये पूरी तरह से तैयार है। शरीर के हर एक रोंगटे से उभरने वाली चाहत वज़ीर को बस अब पा ही लेना चाहती थी। आत्मा के आखिरी छोर से आने वाली हर आवाज उसे वज़ीर की ओर घसीटे ले जा रही थी। वह वज़ीर के साथ अटखेलियां करना चाहता था, उसके बदन से अपना बदन रगड़वाना चाहता था। अब मोहित वाकई अपना कंट्रोल खो रहा था। चुंकी वज़ीर काफी थका हुआ होता है, इसलिये कुछ ही मिनटों में वह नींद के साये में चला जाता है। यहां दूसरे कमरे में मोहित पूरे बिस्तर पर ऊपर नीचे होने लगता है, करवटें बदल रहा है, लेकिन किसी भी तरह वह सो नहीं पा रहा। रात के तीन बजे के आते आते मोहित अपना आपा पूरी तरह से खो देता है, और बंद लाईट