सुंदरता में प्रायः सत्य का स्थायित्व नहीं होता, फिर भी साहित्य सुंदर को पकड़ने की कोशिश करता है। जहाँ तक सत्य का सवाल है, वह अक्सर सुंदर नहीं होता। क्या ऐसा हमारे समय में ही है? कहना मुश्किल है। इस संग्रह में शामिल की गई रचनाएँ इस प्रश्न पर यत्किंचित प्रकाश डालेंगी कि सत्य का कटु होना आज क्यों लाजिमी हो गया है...