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ये दुनिया आखिरी थोड़े ना है: Ye Duniya Aakhiri Thode Na Hai

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त्रिलोचन नाथ तिवारी फेसबुक पर सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले उपन्यासकारों में हैं। आपका मुख्य स्वर तो भारतीय इतिहास की अस्मिता के गायन का है किंतु बीच-बीच में उचंग आने पर अन्य विषयों पर भी लिख डालते हैं। भाषा पर आपकी पकड़ लाजवाब है। सामान्यतः संस्कृतनिष्ठ भाषा में लिखते हैं ... भारतीय इतिहास की गौरव-गाथाओं के लिए वही उपयुक्त भी है परंतु जैसा पहले कहा कि उचंग आने पर ... बस उचंग आ गयी और यह उपन्यासिका उर्दू की चाशनी से लबरेज़ भाषा में लिख डाली। प्रस्तुत लघु उपन्यास ‘ये दुनियां आखिरी थोड़े ना है’ आत्माओं से साक्षात्कार की कहानी है। कहानी के विषय में यहाँ कुछ भी कहना उचित नहीं होगा, वह कथानक के रहस्य को उद्घाटित कर देना होगा। पर इतना फिर भी कहूंगा कि आत्मायें दुष्ट प्रकृति की ही नहीं होतीं - हमाë

61 pages, Kindle Edition

Published August 3, 2018

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