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कौवों का हमला

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पारिवारिक एडवेंचर कहानी, जिसमें हर पल थ्रिल के साथ साथ, भाई - बहन की नोंक झोंक, मम्मी की डांट का डर और उनसे बचाने के लिए पापा का ढाल बन जाना और बदले में खुद ताने सुनना मजेदार है।

भाई बहन, उन्नत और आशी अपने प्यारे सड़क के कुत्ते मूलचंद के साथ, मछलीवाली आंटी की मछलीयों को बचाने के चक्कर में कौवों से पंगा ले लिया। कौवे बदला लेने के लिए उन्नत, आशी और मूलचंद के पीछे पड़े गए। बच्चे तो घर में छिप गए लेकिन मम्मी ने मूलचंद को घर में रखने की इजाजत नहीं दी। उन्नत और आशी ने पापा के साथ मिलकर मम्मी, जिन्हें घर में कुत्ते रखना पसंद नहीं, उनको मूलचंद को घर में रखने के लिए मनाया। लेकिन क्या कौवों से उनका पीछा इतनी आसानी से छूटने वाला था।

143 pages, Paperback

Published January 1, 2018

6 people want to read

About the author

Ajay Kumar

552 books5 followers

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Displaying 1 - 2 of 2 reviews
Profile Image for विकास 'अंजान'.
Author 8 books44 followers
July 27, 2018
अजय जी का लिखा बाल उपन्यास पढ़ा जिसने मेरा भरपूर मनोरंजन किया।

कहानी के विषय में तो इतना कहूँगा कि भले ही यह एक बाल उपन्यास है लेकिन वयस्क भी इसका आनंद ले सकते हैं। मुझे तो पढ़ने में बड़ा मज़ा आया। अगर आपके घर में बच्चे हैं तो उन्हें इस उपन्यास को आप ज़रूर पढ़ाएं। मुझे यकीन है कि मूलचंद, उन्नत और आशी से मिलकर बच्चे ज़रूर खुश होंगे।

मेरी विस्तृत राय आप निम्न लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं:
कौवों का हमला
5 reviews3 followers
September 1, 2018
कौवों का हमला - एक आनंदमयी उपन्यास। धन्यवाद देना चाहूंगा मैं लेखक का। उपन्यास के 143 पन्ने पढ़ते पढ़ते पता ही नही लगा कि कब खुद उन बाल किरदारों में उतर गए। बाल मन का इतना सटीक चित्रण कि खुद का बचपन याद आ गया। कैसे बहन के रोने पर मार स्वयं का पड़ना तय रहता था। कैसे बाहर खेलने की आशाओं पर मां की एक कड़क आवाज़ एक झटके में पानी फेर देती थी। कैसे हमेशा नई नई तिकड़म दिमाग में आती रहती थी। कैसे जीवन छोटी छोटी खुशियां ढूंढा करता था। लेखक ने बाल मन का शायद कोई भी चित्रण अछूता नही छोड़ा। संयोगवश जीवन ऐसे मोड़ पर हैं आज जहां बाल किरदारों के साथ उनके मां बाप के साथ भी जुड़ाव महसूस होता है। धन्यवाद लेखक का एक मन को तरोताज़ा कर देने वाला उपन्यास लिखने का जिसने बचपन को एक बार फिर जीने का मौका दिया। शानदार कृति अजय।
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