श्री गुप्ता ने सरल बुद्धि का प्रयोग करते हुए तथा किसी भी पूर्वाग्रह से मुक्त हो कर रामायण का अध्ययन करने के बाद उस के प्रमुख चरित्रें एवं घटनाओं के बारे में अपना चिंतन इस पुस्तक में संकलित किया है। रामायण कोई धर्मग्रंथ नहीं, बल्कि साहित्यिक रचना है। लेकिन श्री गुप्ता ने उस की काव्यात्मकता की ओर ध्यान न दे कर नई क्रांतिकारी विचारधारा के अनुसार उस के ऐतिहासिक, सामाजिक, राजनीतिक, नैतिक तथा मानवीय मूल्यों पर ध्यान केंद्रित किया है। रामायण के सही मूल्यांकन के लिए यह पुस्तक हर हिंदू परिवार के लिए अनिवार्यतया पठनीय एवं संग्रहणीय है।