सच्ची घटना पर आधारित यह उपन्यास धारावाहिक के रूप में साप्ताहिक "पाञ्चजन्य" में पहले छपा था और काफी लोकप्रिय हुआ था।
जासूसी नॉवेल है या यूँ कहें कि जासूस के लाइफ पर है क्योंकि कोई सस्पेंस नहीं रखा गया है।शुरुआत में ही बता दिया गया है कि मुख्य पात्र, जो कि इजरायल का जासूस है, मारा जा चुका है।
इजरायल के गठन के ठीक बाद का समय चुना गया है। अभी उसे रूस समर्थित सीरिया से खतरा है। सीरिया से ताकतवर होने के बावजूद एक ऐसे स्ट्रेटेजिक लोकेशन पर रुसी तोपें तैनात है कि इसरायल को ख़त्म किया जा सकता है। उसी लोकेशन के फतह में उस जासूस के रोल की कहानी फ़्लैश बैक में है।
उस समय का अरब/सीरियन अरब की मानसिकता, यहूदियों और उनके बीच की पारस्परिक घृणा, विदेशों में बसे अमीर सीरियन अरब नागरिकों की सोच, देश के प्रति लगाव, यहूदियों का देश के प्रति समर्पण...
और अपने पुराने रूप/पहचान को मार नए रूप में जी रहे जासूस का अपने परिवार को याद करना, उनके लिए तड़प।