Madhav123 reviews6 followersFollowFollowDecember 27, 2022सरसठ की उम्र में भारती को, ख़ासकर उनके काव्यग्रंथ 'ठण्ढ़ा लोहा' को पढ़ना एक अनोखा अनुभव रहा। प्रेम की तरुण दैहिकता एवं लौकिकता तथा सामाजिक कुंठा का तीखापन अभी भी झकझोर जाता है।hardcopy
Shubham Kushwaha5 reviewsFollowFollowAugust 31, 2025डोले का गीत 💔दूसरा पत्र 💔फूलों की मौत 💔दो आवाजें 💔बातचीत का एक टुकड़ा 💔🩷heart-touching