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Vimal #19

पाप की नगरी

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महीनों की जद्दोजहद के बाद विमल ने आखिरकार नया चेहरा तो पा लिया परन्तु जल्द ही उसे अहसास हो गया कि उसकी चिर-परिचित नगरी अभी भी पापियों से भरी पड़ी थी और उनका सरताज, इकबालसिंह, बखिया के बाद ‘कम्पनी’ पर काबिज होकर खुद को खुदा से भी दो हाथ ऊपर समझने लगा था ।

226 pages, ebook

First published May 1, 1990

22 people are currently reading
218 people want to read

About the author

Surender Mohan Pathak, is an author of Hindi-language crime fiction with 314 books to his credit. His major characters are Crime reporter Sunil (unprecedented 123 Titles), Vimal (46 Titles) and Philosopher Detective Sudhir (23 titles). Apart from series, he has written 60+ Novels in thriller category.

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5 (8%)
Displaying 1 - 5 of 5 reviews
Profile Image for Rajan.
637 reviews43 followers
January 10, 2021
बखिया और इकबालसिंह में यह भी एक फर्क था कि जहां बखिया जो काम करता था बिना किसी का खौफ खाए, बिना अंजाम की परवाह किए, डंके की चोट पर करता था, वहां इकबालसिंह हर कदम फूंक-फूंककर उठाने में विश्वास रखता था । इकबालसिंह नहीं जानता था कि जिसे वह अपनी होशियारी और दूर-अंदेशी समझता था, उसे ‘कंपनी’ के दुश्मन उसकी कायरता और कमजोरी समझते थे । यही कारण था कि इब्राहीम कालिया जैसे मामूली स्मगलर की ‘कंपनी’ से टककर लेने की मजाल हो गई थी और आज की तारीख में वह ‘कंपनी’ के उसी व्यापार को चोट पहुंचाने की कोशश कर रहा था जो सालों से बिना किसी भी प्रकार के विघ्न के बड़े सुचारु रूप से चला आ रहा था । वो व्यापार था ‘कंपनी’ का नारकाटिक्स स्मगलिंग का धंधा जिसमें बाधा डालने की हिम्मत भारत तो क्या एशिया के किसी गैंगस्टर की नहीं हुई थी ।











वह कोई पैंतालीस साल का लंबा, ऊंचा, निहायत आकर्षक व्यक्तिखत्व वाला व्यक्ति था । औरतों का रसिया था, दूसरों की खूबसूरत बीवियों पर निगाह रखना उसका पसंदीदा शौक था क्योंकि बकौल उसके बीवियां सिंगल हैंड ड्राइव कार की तरह भरोसेमंद टिंकाऊ और ज्यादा माइलेज देने वाली होती थीं । चांदनी जैसी औरतों को वह टैक्सी का दर्जा देता था जो कि साल-डेढ साल में ही खड़-खड़ बोल जाती थीं । यही वजह थी कि कैब्रे जायंट चलाने जैसे धंधे में होने के बावजूद वैसी औरतों में उसकी कोई दिलचस्पी नहीं थी । कैब्रे डांसरों को वो फारस रोड की बाइयों से जरा ही बेहतर समझता था । इसीलिए रात के डेढ बजे चांदनी को उसके फ्लैट पर छोड़कर आना सितोले को एक निहायत बदमजा जिम्मेदारी लग रही थी।
Profile Image for Sameer Mehra.
237 reviews2 followers
September 24, 2022
3.5/5 stars

सतीश की मरसीडीज़ में लाइटर से मौत, विमल की कालिया के सामने हाथ उठाकर एंट्री, चांदनी का धोखा और उसकी हॉरर वाली मौत, वैभवी का विमल के सामने बेबस होना और फिंगरप्रिंट बदल जाना जैसे दृश्य बेहद प्रभावित करते है.

इस उपन्यास में ना तो टापू को लूटा गया और ना ही इक़बाल मारा गया, सिर्फ एक खाँचा तैयार किया गया है. विमल के शमशेर भट्टी के ऊपर मारे गये टॉन्ट बेहद पसंद आये, बार बार हँसा... इस उपन्यास को पूरे तरीके से विमल की किताब कहें तो गलत नहीं होग़ा क्यूंकि शुरू से लेकर अंत तक केवल विमल ही छाया हुआ है .
Profile Image for Mukesh Kumar.
166 reviews63 followers
March 24, 2017
Pulpy fun! Does the job well, which it sets out to do. And the action/plot is believable enough to not turn you off
Profile Image for Souveek .
16 reviews1 follower
September 18, 2016
This one's my first Hindi pulp fiction. Even though Hindi is not my first language, the way SMP skillfully plotted the story and the various characters, I kept turning the pages.
Displaying 1 - 5 of 5 reviews

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