जगदीश चन्द्र का यह उपन्यास सही मायनों में प्रेमचंद की परंपरा को आगे बढ़ाता हुआ उपन्यास है। वर्ग संघर्ष को सटीक रूप से दर्शाने वाले बहुत ही कम उपन्यास उपलब्ध है लेकिन जगदीश जी का यह उपन्यास इस विषय पर मील का पत्थर है। पंजाब की पृष्टभूमि पर रचा गया यह उपन्यास केवल पंजाब ही नहीं बल्कि तत्कालीन समूचे ग्रामीण भारत में व्याप्त दुराचार, अंधविश्वास और वर्ग संघर्ष को हमारे समक्ष प्रस्तुत करता है।