इस संग्रह में मुशर्रफ आलम जौकी जी की निम्न कहानियों को संकलित किया गया है : १. मुझे भूतों से, जानवरों से प्यार करने दो २. बारिश में एक लड़की ३. फ्रिज में औरत ४. नहीं! आप शहर का मजाक नहीं उड़ा सकते ५. मादाम एलिया को जानना जरूरी नहीं ६. मुझे उसे जिंदा रखना है ७. सबसे अच्छे इंसान ८. अगली बारिश तक ९. मजमून की आखिरी लाइन १०. हम दानिश्वर ११. एक मुट्ठी ख़ाक
बहुत दिनों से सोच रहा था कि इस संग्रह के विषय में लिखूँ। क्या लिखूँ ये समझ नहीं आ रहा था? एक कहानी संग्रह को रेट करना हमेशा से ही मुश्किल रहता है। एक तो उसमे कई रचनायें होती है जो आपको अलग अलग तरह से प्रभावित करती हैं। ऐसे में मैं हर रचना को अलग से रेट करता हूँ। इस पुस्तक में संकलित रचनाओं को रेट करने में अपने आप को अक्षम पा रहा हूँ। केवल इतना कहूँगा कि सारी कहानियाँ मुझे पसन्द आई। संकलित कहानियों में उर्दू का असर ज्यादा देखने को मिलता है जिससे संवाद पढने में मुझे आनंद आया। (वैसे मुझे ये पता है मुशर्रफ जी उर्दू के लेखक हैं। इसलिए इन कहानियों में उर्दू का असर लाज़मी है। ) इसके इलावा कुछ कहानियों जैसे 'फ्रिज में औरत' और 'नहीं! आप शहर का मज़ाक नहीं उड़ा सकते।' में फंतासी का तत्व है। पहली कहानी में एक औरत है जो फ्रिज से प्रकट होती है और दूसरी कहानी में शहर एक किरदार के रूप में दिखता है। ये कहानी में एक नयापन लाता है। सभी कहानियों की विषय वस्तु अलग है इसलिए पढने में एकरसता नहीं दिखती है। इसके इलावा जो दूसरी बात इस संग्रह में मुझे दिखती है वो ये कि कहानियाँ जरूर हिंदी में हैं लेकिन सभी कहानियाँ भारतीय परिवेश में नहीं घटती हैं। कहानियों के पात्र भी भारतीय नहीं हैं। मुझे ऐसी कहानियाँ पढने में मज़ा आता है जो हिंदी में लिखी गई हो लेकिन उसके पात्र और जिधर ये घटती है वो क्षेत्र हिंदी भाषी न हो। इससे हम एक हिंदी भाषी के दृष्टिकोण से उस समाज को देखते हैं। ये अनुवाद से अलग होता है और इसको पढने का अनुभव भी अलग होता है। संग्रह के विषय में आखिरी में इतना ही कहूँगा कि संग्रह मुझे काफी पसन्द आया और इसे पढना मेरे लिये अलग अनुभव था। पूरे विचार आप इधर जाकर पढ़ सकते हैं : फ्रिज में औरत मुशर्रफ साहब का ये साक्षात्कार मिला। दिलचस्प है देखियेगा अगर वक्त मिले तो। https://www.youtube.com/watch?v=x9-o0...