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योगफल

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सुपरिचित कवि अरुण कमल का यह संग्रह जीवन के अनेक अनुभवों, प्रसंगों और चरित्रों का योगफल है। इसकी मूल प्रतिज्ञा ही यही है कि प्रत्येक जीवन समस्त जीव-जगत का, वरन् भुवन के प्रत्येक तृण-गुल्म का, समाहार है। इसलिए कोई भी इयत्ता या पहचान शेष सबको अपने में जोड़कर ही पूर्णता प्राप्त करती हैं। अतिरंजना का जोखिम उठाते हुए कहा जा सकता है कि इसीलिए एक कवि, श्रेष्ठ कवि, सम्पूर्ण मनुष्यता का योगफल है। यहाँ अरुण कमल की कविता के प्रायः सभी पूर्वपरिचित अवयव या स्वर उपस्थित हैं। लेकिन जो बाकी सबसे किंचित् भिन्न और नवीन है वह है कविता का बहुमुखी होना। वह एक साथ कई दिशाओं में खुलती है। एक ही रश्मि अनेक पहल और कटावों से आती-जाती है। पहली कविता 'योगफल' से लेकर अन्तिम कविता 'प्रलय' तक इसे देखा जा सकता है जहाँ दोनों तरह के खदान हैं- धरती के ऊपर खुले में तथा भीतर गहरे पृथ्वी की नाभि तक। हर अनुभव को उसके उद्गम और फुनगियों तक टोहने का उद्यम । इसीलिए यहाँ कुछ भी त्याज्य या अपथ्य नहीं है-न तो रोज-ब-रोज के राजनीतिक प्रकरण, जो कई बार हमारे जीने या मरने की वजह तै करते हैं, न ही रात के तीसरे पहर का स्वायत्त एकान्त । द्वन्द्वों एवं विरुद्धों का समावेश करती यह एक सम्पूर्ण कविता है- 'नीचे धाह ऊपर शीत' ।

इस कविता संग्रह में एक और नया आयाम देखा जा सकता है। अरुण कमल की अब तक की सबसे लम्बी दो कविताओं के साथ-साथ कुछ कविता श्रृंखलाएँ भी हैं जिससे लगता है कि कवि के लिए अब एक अनुभव या भाव पहले से अधिक परतदार एवं संश्लिष्ट हुआ है और वह एक ही निर्मिति में पूर्ण नहीं होता, बल्कि एक मूर्ति बनने के बाद भी कुछ मिट्टी बच रहती है, बची रह जाती है । यहाँ 'प्रलय' शीर्षक कविता को भी देखा जा सकता है जो कई बार स्वचालित सी लगती है और बिना किसी कथानक या मिथक के दैनन्दिन प्रसंगों से आकार ग्रहण करती हुई लगभग अनियोजित बसावट की तरह बढ़ती है और लगता है अभी और खाली जगहें चारों तरफ रह गयी हैं। यानी हर योगफल अन्ततः अपूर्ण है ।

इन कविताओं की एक और विशेषता अनेक अन्तःध्वनियों की उपस्थिति है। अनेक पूर्व स्मृतियाँ और अनुगूँजें हैं।

अरुण कमल की कविताएँ अपनी गज्झिन बुनावट, प्रत्येक शब्द की अपरिहार्यता और शिल्प-प्रयोगों के लिए जानी जाती हैं। गहन ऐन्द्रिकता, अनुभव-विस्तार और अविचल प्रतिरोधी स्वर के लिए ख्यात अरुण कमल का यह संग्रह हमारे समय के सभी बेघरों, अनाथों और सताये हुए लोगों का आवास है-एक मार्फत पता ।

92 pages, Paperback

Published January 1, 2019

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About the author

Arun Kamal

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जन्म: 15 फरवरी, 1954 को नासरीगंज, रोहतास (बिहार) में।

प्रकाशित पुस्तकें: चार कविता पुस्तकें - अपनी केवल धार, सबूत, नये इलाके में, पुतली में संसार तथा मैं वो शंख महाशंख। दो आलोचना पुस्तकें - कविता और समय तथा गोलमेज। साक्षात्कार की एक पुस्तक - कथोपकथन। समकालीन कवियों पर निबन्धों की एक पुस्तक - दुःखी चेहरों का शृंगार प्रस्तावित। अंग्रेजी में समकालीन भारतीय कविता के अनुवादों की एक पुस्तक - वायसेज़ वियतनामी कवि तो हू की कविताओं तथा टिप्पणियों की अनुवाद-पुस्तिका। साथ ही मायकोव्स्की की आत्मकथा के अनुवाद एवं अनेक देशी-विदेशी कविताओं के अनुवाद।

अनेक देशी-विदेशी भाषाओं में कविताएँ तथा कविता-पुस्तकें अनूदित।

सम्मान: कविता के लिए भारतभूषण अग्रवाल स्मृति पुरस्कार, सोवियत लैंड नेहरू अवार्ड, श्रीकांत वर्मा स्मृति पुरस्कार, रघुवीर सहाय स्मृति पुरस्कार, शमशेर सम्मान और नये इलाके में पुस्तक के लिए 1998 का साहित्य अकादेमी पुरस्कार।

डॉ. नामवर सिंह के प्रधान सम्पादकत्व में आलोचना का सम्पादन (सहस्राब्दी अंक 21 से)।

सम्प्रति: पटना विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के अध्यापक।

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