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तेरे संग यारा

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वेद की ज़िंदगी में अकेलेपन, नीरसता के सिवा कुछ नहीं था कहने को तो सब कुछ हासिल था उसे पर अकेलेपन की टीस उसे हमेशा चुभती थी फिर एक अनजान से सफर में उसकी मुलाकात आशी से हुई जिसे देख उसके दिल में हलचल सी मची ऐसा लगा जैसे उसकी अधूरी सी कहानी को एक मुकम्मल सा अंजाम मिल गया हो
आशी ने बचपन से ही स्वार्थ और दिखावे से भरी रिश्तों की चमक देखी थी उसने टूटते रिश्तों का दर्द सहा था उसके लिए किसी को अपने जीवन में खास जगह दे पाना मुश्किल था वेद से उसकी मुलाकात ने उसे रिश्तों की एक नई उम्मीद दी थी पर अपनी उलझन में आशी खुशियों का हाथ थामने से हिचकती रही
क्या वेद आशी के दिल में अपने लिए जगह बना पाएगा?
क्या आशी वेद का थाम उसकी अधूरी कहानी को मुकम्मल कर पाएगी?

अस्पताल के बिस्तर पर लेटे-लेटे आशी और वेद के मन में य&

174 pages, Kindle Edition

Published February 6, 2026

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Aakash Deep

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