वारिस
पाठक साहब द्वारा लिखी गयी थ्रिलर सीरीज में मुकेश माथुर की दूसरी और थ्रिलर सीरीज में 46वि रचना है वारिस. ये सन २००२ में मनोज पोच्केट बुक्स द्वारा प्रकाशित की गयी थी.
कहानी कुछ यूँ हैं की देवसरे अपनी नौजवान बेटी के एक्सीडेंट में हुई मौत के बाद मानसिक रोगी बन बैठा था और अपनी बेटी जिसने उसकी मर्ज़ी के बगैर शादी की थी के पीछे पीछे इस दुनिया से रुखसत कर जाना चाहता था . दो असफल प्रयासों के बाद देवसरे जो एक धनी व्यक्ति था के दोस्त नकुल बिहारी आनंद ने मुकेश माथुर को हमेशा उनके साथ रहने की असाइनमेंट पर लगा दिया . देवसरे का दामाद पाटिल एक रोज़ उसी रिसोर्ट पर आ धमका जहाँ देवसरे मुकेश माथुर के साथ अपने दिन गुज़ार रहा था और अपनी नार्मल जिंदगी में वापस आने की कोशिश कर रहा था. देवसरे अपने दामाद के विरसे में की गयी मांग के चलते फिर आत्महत्या की कोशिश करता उसके पहले ही उसका क़त्ल हो गया जिसका एक सस्पेक्ट खुद मुकेश माथुर था . क्या मुकेश अपने को बेकसूर साबित कर पाया क्या वो असली कातिल को खोज पाया, क्या पाटिल ही असली कातिल था या कोई और और देवसरे की विपुल धनसंपदा का वारिस कौन था. इन सबके जवाब वारिस में छुपे हैं. जो मुझे यकीन है की आप लोग पढ़ चुके होंगे, यदि नहीं तो इतनी रोचक मर्डर मिस्ट्री आप पढ़े बिना नहीं रह सकते. जिसमे मुकेश माथुर और नकुल बिहारी आनंद की क्रॉस टॉक का तड़का भी लगा हो.