फोटोग्राफर अद्विक के लिए वह कार एक्सीडेंट एक अंत नहीं, बल्कि एक नर्क की शुरुआत था। जब उसकी आँखें खुलती हैं, तो उसे काव्या मिलती है—एक समर्पित नर्स, एक फरिश्ता, जो उसे अपने घर ले आती है और ठीक करने का वादा करती है।
लेकिन काव्या के 'मरहम' में शिफा नहीं, बल्कि एक मीठा ज़हर है।
जल्द ही अद्विक को अहसास होता है कि वह मेहमान नहीं, बल्कि एक कैदी है। काव्या उसे ठीक नहीं कर रही, बल्कि उसे इंच-दर-इंच तोड़ रही है—ताकि वह कभी उसे छोड़कर न जा सके। बंद दरवाज़ों, नशीली दवाओं और एक सनकी जुनून के बीच, अद्विक का शरीर ही नहीं, उसकी रूह भी गुलाम बनने लगती है।
यह कहानी प्यार की नहीं, कब्ज़े (Possession) की है।