उपन्यास- स्याही और इश्क़ ( जब ज़िंदगी एक उपन्यास बन गई )कभी सोचिए, अगर आपको एक दिन पता चले कि आपकी साधारण सी ज़िंदगी, आपकी आदतें, आपके सपने, किसी और की कहानी का हिस्सा हैं? क्या हो अगर आप देश के सबसे बड़े बेस्टसेलिंग उपन्यास के सबसे प्रसिद्ध किरदार हों, और आपको खुद इस बात की खबर न हो?
मेरी यह कहानी एक ऐसी ही असंभव सी लगने वाली हकीकत से शुरू होती है। यह कहानी है मुंबई के एक आम से 1BHK फ्लैट में रहने वाली राधा की, जो अपनी नौकरी की घुटन और टूटे हुए सपनों के बीच बीकेसी की चमचमाती दुनिया में अपनी जगह बनाने के लिए लड़ रही है। और यह कहानी है राघव की, एक ऐसे लेखक की जो अपनी कल्पना की दुनिया में तो बादशाह है, लेकिन हकीकत की भीड़ से डरकर एक खामोश ज़िंदगी जीता है।
"स्याही और इश्क़" इन दो दुनियाओं के टकराव की कहानी &#