क्या हो अगर आपको बताया जाए कि आपकी ज़िंदगी के सिर्फ 60 दिन बचे हैं?
"अंतिम साँसों में एक सुबह" एक गहराई से भरी आत्मकथा-सदृश कथा है, जो न केवल मृत्यु का सामना करती है, बल्कि जीवन की उन परतों को भी उजागर करती है, जिन्हें अक्सर हम अनदेखा कर देते हैं। यह कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जिसने जीवन भर संघर्ष किया, रिश्ते खोए, मासूम इच्छाएँ दबा दीं, और अंत में... स्वयं को खो दिया।
जब डॉक्टर उसे बताते हैं कि अब उसके पास सिर्फ 60 दिन हैं — तो वह टूटता नहीं, बल्कि पहाड़ों की ओर एक यात्रा पर निकल पड़ता है। वहाँ उसे फिर से साँस लेने का मौका मिलता है, और मिलती है एक छोटी बच्ची — आशी — जो एक गुड़िया की तलाश में है। यही मासूम मुलाकात उसके जीवन का रुख बदल देती है।