प्यार, फिर से एक बारक्या एक टूटा हुआ दिल फिर से प्यार करने की हिम्मत कर सकता है? क्या किसी की रूहानी तृष्णा उसे अतीत के ज़ख़्मों से आज़ादी दिला सकती है?
मिलिए निशा से, 35 साल की एक तलाकशुदा माँ। दिल्ली के ज़ख़्मों को समेटकर वो देहरादून में एक नई ज़िंदगी शुरू करना चाहती है, पर उसका ख़ुद का दिल प्यार की एक अधूरी तृष्णा से ख़ाली है।
तभी उसकी ज़िंदगी में आता है राघव—एक शांत आर्किटेक्ट, 48 वर्ष, अविवाहित, जिसकी गहरी आँखों में निशा को वो सुकून मिलता है, जिसे वो सालों से ढूंढ रही थी। राघव की दुनिया में आकर निशा को लगता है कि शायद प्यार को एक और मौक़ा दिया जा सकता है।