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लस्टस : अन्धकार के साम्राज्य का अधिपति (HINDI KAVAY SANGRAH Book 3)

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लस्टस मानसिक विद्रूपता का भयानक आईना दिखाता महाकाव्य
मूल रचना अंग्रेज़ी : डॉ.जे. एस. आनंद
हिंदी अनुवाद : रजनी छाबड़ा
बुराई सदियों से अच्छाई पर हावी होने की कोशिश करती है और काफ़ी हद तक सफल भी रहती है,परन्तु, अंततः जीत का सेहरा किस के सिर पर बँधता है?
उम्र के आख़िरी कग़ार पर खड़ा सेटन 'महादानव' (मिल्टन के पैराडाइज़ लॉस्ट का काल्पनिक मुख़्य पात्र ) यह सोच कर व्यथित हैं और व्यग्र है कि अथक परिश्रम से, उसके द्वारा स्थापित अराजकता के राज्य को उसके बाद कौन सम्भालेगा? सोच विचार के बाद उसके मन में अपने भतीजे लस्टस का ख़्याल आता है कि वह इस अन्धकार के साम्राज्य का अधिपति बनने के लिए सुयोग्य पात्र है/ लस्टस का राज्याभिषेक धूमधाम से कर दिया जाता है/ तदुपरांत, वह अपने नवगठित मंत्री मण्डल

135 pages, Kindle Edition

Published March 6, 2025

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Rajni Chhabra

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