कभी भारत के लोगों को कहा गया था कि वे मशीनी दुनिया के लिए नहीं बने। उनमें यंत्र बनाने की क्षमता ही नहीं। जब ऐसा कहा जा रहा था, उस वक्त भी भारत में वह तरंगें मौजूद थी। भारत इंजीनियरों के ऐसे देश बनने की ओर बढ़ रहा था, जिनकी जरूरत पूरी दुनिया को होगी। आइआइटी और कंप्यूटर की जमीन तैयार हो रही थी। अमरीका से कदमताल मिलाते हुए इसने ऐसा तंत्र बनाया जिसकी जरूरत अमरीका को भी पड़ने लगी। सॉफ़्टवेयर पार्कों के शीशमहल से गाँव के पान की दुकान में लगे QR कोड तक। किस तरह सोने की चिड़िया कहा जाने वाला यह देश बना सिलिकन की चिड़िया?
Praveen Jha continues to write what he does best, research based book in a simplified story format. This book is a great summary on India's silicon/IT revolution, starting all the way from the first computers, to super computers, how IITs were established and how India became an IT superpower. Absolutely worth a read.