‘राजीव भाई’ को इस तथ्य का एहसास हो चुका था कि जब तक भारत का हर व्यक्ति अपनी बीमारी स्वयं ठीक ना करे तब तक भारत में रोगियों की संख्या घटेगी नही। इस संदर्भ में ‘राजीव भाई’ ने सन् 2007 में चेन्नई में चिकित्सा पर सात दिन का व्याख्यान दिया, इस व्याख्यान का उद्देश्य था कि हर व्यक्ति बिना डॉक्टर के व बिना एलोपैथिक,होम्योपैथिक अथवा आयुर्वेदिक औषधियों के अपनी बीमारी को स्वयं ठीक कर सकें। इस पद्धति को स्वदेशी चिकित्सा की संज्ञा दी जिसके अंतगर्त राजीव भाई ने ऐसा विकल्प दिया जो सस्ता हैं एवं बीमारियों को स्थायी रूप से बिना किसी दुष्प्रभाव के ठीक करता हैं।
आज आप व हम जिस काल में जी रहे हैं शायद इतिहास का वह सबसे बुरा समय हैं। जो कुछ भी हम अनाज, दालें, सब्जी, फल आदि का सेवन कर रहे हैं वे सब विषयुक्त हैं।