विजयालय द्वारा स्थापित चोल वंश का अंतिम शासक अधिराजेंद्र, वीरराजेन्द्र का पुत्र था, जबकि वेंगी का चालूक्य नरेश राजेन्द्र(द्वितीय) वीरराजेन्द्र के बड़े भाई राजेन्द्र चोल(द्वितीय) का दामाद था। इस प्रकार वेंगी का चालूक्य नरेश कुलोतुंग, पोन्नियिन सेल्वन का प्रपौत्र था। कुलोतुंग द्वारा 1070ई० में चोल-चालुक्य वंश की सत्ता स्थापित हुई। कुलोत्तुग चोल के सिंहासनारोहण से चोल इतिहास में एक नये युग का सूत्रपात हुआ। इसके बाद का चोल इतिहास चोल-चालुक्यवंशीय इतिहास के नाम से जाना गया। भारत के दक्षिणी भाग में 1800 वर्षों के शासन के बाद चोल-चालुक्य राजवंश भी 1279ई० के आसपास सूर्यास्त में चले गए। उनके वंशज स्थानीय सरदार बन गए जो अज्ञात रूप से छोटे क्षेत्रों पर शासन कर रहे थे। हालांकि भारत में चोल वंश का &