Prithvi Raj38 reviewsFollowFollowMarch 24, 2026शुक्ल के बिना द्विवेदी जी एक सम्पूर्ण मूर्ती गढ़ना नामवर जी के लिए सम्भव ना हो सका और ना ही दूसरी परम्परा अपने से पूर्व की परम्परा से किसी विशिष्ट अर्थ में भिन्न दिखा पाए।