This ebook is from Rajpal and Sons, a 103 year-old publishing house headquartered in Delhi. Rajpal and Sons publishes books in English and Hindi languages, in non-fiction, fiction, classic and contemporary literature, and children categories.
“ कहानी ज़िंदगी पर सही बैठे, यही सबसे बड़ी माँग हम कहानी से करते हैं।”
भीष्म साहनी जी के “तमस” से मेरा साबिका उच्चतर माध्यमिक कॉलेज के दिनों में पड़ा था। एक बार उनके साहित्य से परिचय हो जाने पर आप उनको भूल नहीं सकते, ऐसा मुझे लगता है। स्कूल के पाठ्यक्रम में भी दो एक बार उनकी कहानियों या संस्मरणों से आमना-सामना हुआ था। जैसे उनकी ‘कालजयी’ कहानी - “चीफ़ की दावत” (कक्षा एकादश) और “रूस की एक झलक” (कक्षा सप्तम)।
इस कहानी संग्रह में पहली कहानी चीफ़ की दावत ही है जो आपको इंसानी खोखले मूल्यों से परिचय करवाती हैं। कैसे आप कैरियर की सीढ़ियाँ चढ़ने के लिए हर किसी को टूल की तरह व्यवहार करने से गुरेज़ नहीं करते। उनकी कहानियों ने बालमन, स्त्री-मन और पुरुष-मन को बड़े हल्के हाथों से छुआ है जैसे! कहानियों में कोमलता है किंतु अंतर्विरोध की धारा कोमलता के आवरण में अजस्र बहती ही जाती है, कहीं साथ नहीं छोड़ती! व्यंग्य के पुट भी हैं! कहानियों की जो क्षमता है (मेरे विचार में उपन्यासों से थोड़ी कम), उसका पूरा प्रयोग भीष्म साहनी जी करते हैं - ताकि पाठक के मानस को उद्वेलित किया जा सके। ये कहानियाँ मात्र जीवन दर्शन ही कराती हों, ऐसा नहीं है। वे निश्चय ही हमें सचेत भी करती हैं, हमारे अन्दर दायित्व की भावना भी जगाती हैं, हमारी अनुभूतियों को अधिक संवेदनशील भी बनाती हैं, सौन्दर्यबोध के स्तर पर हमारे लिए उत्प्रेरक का काम भी करती हैं।
“खिलौने”, “वाँगचू”, “समाधि भाई रामसिंह”, “माता-विमाता”, “गंगो का जाया”, “अमृतसर आ गया है…” (भीष्म साहनी कभी भारत विभाजन पर कलमकारी करने से नहीं चूकते), “साग-मीट”, “लीला नंदलाल की” कहानियों से सुसज्जित है यह संग्रह। मेरा दावा है - यदि आप इनके बारे में पूर्व जानकारी न रखते हों तो ये कहानियाँ आपको चौंकाएँगी!
यह कथा-संग्रह पठनीय है और विचारोत्प्रेरक है। धन्यवाद 🙏🏻
Bhisham Sahani is one of my favourite hindi authors. The stories are short and simple worded. At the same time each of his stories make the reader re-think about the quirky aspects of various social norms that we are used to.
आधुनिक हिंदी कहानी के सफर में भीष्म साहनी की इन कहानियों में समाज से गहरे जुड़े प्रश्नों को प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में 10 कहानियां है - चीफ की दावत समाधि भाई रामसिंह माता-विमाता गंगो का जाया सिफारिशी चिट्ठी अमृतसर आ गया है... साग-मीट लीला नन्दलाल की वांगचू खिलौने
सभी कहानियों में आधुनिकता से जुड़े कठोर यथार्थ को प्रकट किया गया है। चाहे स्कूटर-चोरी मसले में कोर्ट की तारीखों का मसला हो या दफ्तर में काम करने वाले दंपत्ति के बच्चे के देखरेख का प्रश्न, चाहे बौद्ध भिक्षु का पुलिस द्वारा प्रताड़ित करना हो या फिर बंटवारे के दौरान रेलों में घट रही हिंसा, सभी कहानियां हमें सोचने पर मजबूर करती हैं। भले यह कहानियां बहुत नाटकीय न हों लेकिन इनकी प्रासंगिकता अभी भी है क्योंकि जो सवाल यह खड़े करती है वह मानव-जीवन की विरोधाभाषों, मज़बूरियों और आधुनिकता में बदलती जीवन शैली की समस्याओं से सम्बंधित है। आज भी वही प्रश्न खड़े हैं। आज भी यह कहानियां घटित हो रही हैं।